हिमाचल में 250 साल पुराने मंदिर का पुनर्निर्माण

चेउनी (हिमाचल प्रदेश): हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले की सिराज घाटी में स्थित 250 साल से अधिक पुराने हडिंबा देवी के प्रसिद्ध मंदिर का पुनर्निर्माण किया गया है।

अधिकारियों ने बताया कि नए मंदिर का निर्माण पुराने मंदिर की तरह ही किया गया है। प्रथम नवरात्र की मंगलवेला पर मंदिर के कपाट फिर से जनता के लिए खोल दिए जाएंगे।

गौरतलब है कि मंदिर के निर्माण में प्रयोग की गई लकड़ी सड़ गई थी, जिसके कारण पुराना मंदिर ध्वस्त हो गया था।

मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष रुद्रमणि ने आईएएनएस से कहा, "हडिंबा देवी, सिराज घाटी की मुख्य देवी हैं। इस मंदिर का पुनर्निर्माण खास पहाड़ी वास्तुकला में किया गया है।"

उन्होंने बताया कि पुराने मंदिर के ध्वस्त होने के बाद नए मंदिर के निर्माण में एक करोड़ रुपए से अधिक लागत और डेढ़ साल का समय लगा।

रुद्रमणि ने बताया, "नया मंदिर, वास्तविक मंदिर की सटीक प्रतिकृति है।"

यह मंदिर प्रांत की राजधानी शिमला से 250 किलोमीटर की दूरी पर स्थित मंडी शहर की चेउनी पंचायत के सराहो गांव में देवदार के जंगलों के बीच स्थित है।

मंदिर के एक अन्य ट्रस्टी फतेह सिंह ने कहा कि मूल संरचना बनाए रखने के लिए नए मंदिर का निर्माण वास्तविक मंदिर के स्थान पर ही किया गया है।

उन्होंने बताया कि पहले भी कई बार मंदिर का पुनर्निर्माण हो चुका है।

मंदिर के अधिकारियों ने बताया कि ध्वस्त मंदिर के देवदार की लकड़ी के कुछ शिलालेखों के अनुसार आखिरी बार मंदिर का पुनर्निर्माण 1855 में हुआ था।

सिंह ने बताया, "मंदिर के पुनर्निर्माण के लिए विशेष कारीगर लगाए गए थे।"

मंदिर के पदाधिकारियों का कहना है कि मंदिर के पुनर्निमाण का सारा खर्च मंदिर की आय और दान की राशि से वहन किया गया है। क्षेत्र के हर घर ने कम से कम 10,000 रुपये का सहयोग किया है।

शनिवार को जनता के लिए मंदिर के कपाट खुलने से पहले इसकी शुद्धि के लिए विशेष अनुष्ठान किया जाएगा।

मंदिर के पुजारी ने बताया कि मंदिर परिसर में 27 बकरों, एक सुअर, दो मछलियों और एक झींगे की बलि दी जाएगी। उन्होंने बताया कि ये बलि मंदिर की शुद्धि अनुष्ठान का ही भाग है।

देवी को खुश करने के लिए सिराज घाटी में सैकड़ों बकरों की बलि दी जाएगी। परंपरानुसार घाटी के हर घर में एक बकरे की बलि दी जाएगी।

मंदिर के कपाट खुलने से पहले स्थानीय लोग रात भर महाभारत के लोकगीत गाएंगे और नाचेंगे।

यह मंदिर चार स्तरीय पैगोडा के लिए प्रसिद्ध है। मंदिर की स्थापना 1553 में बहादुर सिंह के शासन काल के दौरान हुई थी।

हडिंबा, पांच पांडवों में से एक भीम की पत्नी हैं। हडिंबा देवी का एक अन्य मंदिर मनाली में स्थित है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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