हिमाचल ने 2014-15 में 10,752 करोड़ रुपये ऋण जुटाए : सीएजी

शिमला: हिमाचल प्रदेश सरकार ने वित्त वर्ष 2014-15 में विभिन्न स्रोतों से कुल 10,752 करोड़ रुपये ऋण जुटाए। यह बात देश के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (सीएजी) ने कही। सीएजी के मुताबिक, राज्य सरकार ने 2,345 करोड़ रुपये के ऋण खुले बाजार से 8.08-9.63 फीसदी ब्याज दर पर लिए।

सीएजी ने अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा कि राज्य सरकार ने 444 करोड़ रुपये ऋण वित्तीय संस्थानों से लिए और 1,102 करोड़ रुपये का ऋण राष्ट्रीय लघु बचत कोष (एनएसएसएफ) से लिया।

सरकार ने कुल 6,860 करोड़ रुपये का ऋण भारतीय रिजर्व बैंक से बतौर वेज एंड मींस एडवांसेज लिया, जिसके तहत 4,193 करोड़ रुपये नॉर्मल वेज एंड एडवांसेज से और 2,667 करोड़ रुपये ओवरड्राफ्ट से जुटाए गए।

इस तरह राज्य सरकार ने आलोच्य अवधि में कुल 10,752 करोड़ रुपये के ऋण जुटाए।

राज्य सरकार को केंद्र सरकार से भी ऋण और अग्रिम के रूप में 125 करोड़ मिला।

राज्य सरकार को मार्च 2015 तक 1,944 करोड़ रुपये का राजस्व घाटा और 4,200 करोड़ रुपये का वित्तीय घाटा हुआ, जो सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) का क्रमश: दो फीसदी और चार फीसदी है।

सीएजी ने कहा कि राज्य सरकार के कुल खर्च में वित्तीय घाटा का 18 फीसदी योगदान रहा।

वित्तीय घाटे को 2,617 करोड़ रुपये के शुद्ध सार्वजनिक ऋण, लोक लेखा में वृद्धि (1,731 करोड़ रुपये) और नकदी संतुलन की ओपनिंग और क्लोजिंग में हुई शुद्ध वृद्धि (148 करोड़ रुपये) से पूरा किया गया।

सीएजी ने कहा कि राजस्व आय (17,843 करोड़ रुपये) का करीब 84 फीसदी हिस्सा वेतन, ब्याज भुगतान, पेंशन, सब्सिडी और पगार पर खर्च हुआ।

सीएजी की रिपोर्ट पर टिप्पणी में राज्य सरकार के एक प्रवक्ता ने कहा कि जीएसडीपी की तुलना में देनदारी का प्रतिशत 2011-12 के 42.48 फीसदी से घटकर 2014-15 में 39.96 फीसदी हुआ है।

जीएसडीपी की तुलना में सार्वजनिक ऋण का प्रतिशत भी 2011-12 के 29.36 फीसदी से घटकर 2014-15 में 26.92 फीसदी हो गया है।

प्रवक्ता ने आईएएनएस से कहा कि सार्वजनिक ऋण में गिरावट से साफ है कि राज्य कर्ज के दलदल में नहीं फंसने जा रहा है।

उन्होंने कहा कि 2014-15 में केंद्रीय सहायता में हुई भारी गिरावट के कारण राज्य के लिए यह चुनौतीपूर्ण वर्ष था।

13वें वित्त आयोग में अनुदान घटाया गया है और 2014-15 में राजस्व घाटा अनुदान घटकर 406 करोड़ रुपये रह गया, जो 2010-11 में 2,232 करोड़ रुपये था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस। 

 

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