जाट आरक्षण पर उच्च न्यायालय ने लगाई रोक

चंडीगढ़: हरियाणा सरकार द्वारा जाटों तथा पांच अन्य समुदायों को नौकरी व शैक्षणिक संस्थानों में दाखिले के लिए 10 फीसदी आरक्षण देने की अधिसूचना पर पंजाब व हरियाणा उच्च न्यायालय ने गुरुवार को रोक लगा दी। भिवानी निवासी मुरारी लाल गुप्ता द्वारा दायर एक जनहित याचिका की सुनवाई के बाद उच्च न्यायालय का यह आदेश सामने आया है।

याचिकाकर्ता ने तर्क दिया है कि हरियाणा सरकार का फैसला संविधान की मौलिक संरचना के विपरीत है। उन्होंने पिछले साल सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए उस फैसले का संदर्भ दिया, जिसमें उसने कहा था कि जाटों को पिछड़ा समुदाय नहीं माना जा सकता।

याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि जब सर्वोच्च न्यायालय कह चुकी है कि जाटों को पिछड़ा समुदाय नहीं माना जा सकता, फिर राज्य सरकार को इससे संबंधित कोई अधिनियम पारित करने का अधिकार नहीं है।

राजनीतिक रूप से प्रभावशाली जाट समुदाय के लोगों सहित पिछड़े वर्ग के लोगों को सरकारी नौकरियों में आरक्षण तथा शैक्षणिक संस्थानों में दाखिले में आरक्षण प्रदान करने के लिए हरियाणा सरकार ने 13 मई को हरियाणा पिछड़ा वर्ग (सरकारी नौकरियों तथा शैक्षणिक संस्थानों में दाखिले के लिए आरक्षण) अधिनियम, 2016 की अधिसूचना जारी की थी।

यह अधिनियम तृतीय अनुसूची के तहत जाटों, जाट सिखों, रोर, बिश्नोई, त्यागी, मुल्ला जाटों या मुस्लिम जाटों को तृतीय व चतुर्थ वर्ग श्रेणी की नौकरियों में 10 फीसदी आरक्षण एवं प्रथम व द्वितीय वर्ग श्रेणी की नौैकरियों में छह फीसदी आरक्षण की वकालत करता है।

राज्य सरकार के एक प्रवक्ता ने यहां कहा कि यह इन जातियों से संबंध रखने वाले लोगों को शैक्षणिक संस्थानों में दाखिले में 10 फीसदी आरक्षण प्रदान करता है।

उल्लेखनीय है कि इस साल 29 मार्च को हरियाणा विधानसभा ने जाटों तथा अन्य समुदायों को नौकरियों व शैक्षणिक संस्थानों में दाखिले में आरक्षण प्रदान करने के लिए सर्वसम्मति से एक विधेयक पारित किया था।

आरक्षण के लिए जाटों द्वारा हिंसक आंदोलन करने के बाद प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार ने जाटों तथा अन्य समुदायों को आरक्षण देने का वादा किया था। फरवरी में हुए इस आंदोलन से प्रदेश न सिर्फ नौ दिनों तक ठप रहा, बल्कि अरबों रुपये का नुकसान भी हुआ था।

आंदोलन के दौरान कम से कम 30 लोग मारे गए और 320 लोग घायल हुए थे।

--आईएएनएस 

 

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