'10 लाख से तो जले मॉल की सफाई भी नहीं होगी'

रोहतक: जाट आंदोलन में यहां जलाए गए एक मॉल के मालिक सुरेश शर्मा राहत के रूप में मिली रकम से आहत हैं। वह कहते हैं, "राहत राशि के रूप में मेरे खाते में 10 लाख रुपये आए हैं। पुनर्निर्माण की बात तो छोड़ दीजिए, इस राशि से मॉल की सफाई तक नहीं होगी। मेरी वर्षो की मेहनत मलबे में तब्दील हो गई।" 

हरियाणा में अकेले शर्मा ही नहीं हैं। उनके जैसे सैकड़ों हैं, जिनके प्रतिष्ठानों, दुकानों और संस्थानों को गत माह जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान लूटने के बाद जला दिया गया। अब हाल यह है कि राज्य में गैर जाट व्यापारी समुदाय इस दुविधा में हैं कि उन्हें अपने प्रतिष्ठानों का पुनर्निर्माण करना चाहिए या राज्य के बाहर अन्यत्र कहीं स्थानांतरित करना चाहिए।

शर्मा के आरएन मॉल में मल्टीप्लेक्स सिनेमा हॉल, उत्कृष्ट जिम और अन्य कई शो रूम्स के अलावा रोहतक का इकलौता रेस्तरां मैकडोनाल्ड भी था, जिसे उन्होंने 18 माह पहले ही यहां लाया था। सबके सब जलाकर खाक कर दिए गए। अब मॉल में काम करने वाले करीब सौ कर्मचारी बेरोजगार हो गए हैं।

शर्मा ने आईएएनएस से कहा, "मेरा अनुमान है कि अकेले मॉल में 7 करोड़ रुपये की क्षति हुई है। अब मैं और मेरे कर्मचारी बेरोजगार हैं। हमलोग नहीं जानते कि पुनर्निर्माण के लिए कहां से पैसे आएंगे? सरकार की ओर से मिली राहत राशि इतनी कम है कि वह कोई काम की नहीं है। सरकार को पूरी क्षतिपूर्ति तुरंत देनी चाहिए, क्योंकि सरकार और पुलिस व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को सुरक्षा प्रदान करने में विफल रही।"

उन्होंने कहा कि जब वर्तमान निवेशक सैकड़ों करोड़ की क्षति झेल रहे हैं तो नए निवेशक कैसे राज्य में निवेश करेंगे। इसलिए खट्टर सरकार संभावित 'हैप्पेनिंग हरियाणा इन्वेस्टर्स समिट' को लेकर कैसे आगे बढ़ रही है, यह मालूम नहीं है, लेकिन यहां कानून व्यवस्था नाम की कोई चीज नहीं है।

शर्मा ने कहा कि जाट आंदोलनकारियों ने उनके इंजीनियरिंग कॉलेज और पास स्थित मकरोली कलां गांव में उनके घर में भी आग लगा दी। कॉलेज के सभी कंप्यूटर और अन्य उपकरण भी उठा ले गए। इससे कॉलेज को करीब 4 करोड़ रुपये की क्षति हुई।

उधर, स्थानीय व्यापारियों ने कहा कि जाट प्रदर्शनकारियों ने केवल गैर जाट समुदाय के लोगों जैसे पंजाबी, सैनी, ब्राह्मण और अन्य व्यापारियों के प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया।

हालांकि हरियाणा की भाजपा सरकार राज्य में हिंसा रोकने में पूर्णत: विफल रही, लेकिन अब यह दिखाने की कोशिश कर रही है कि जाट आंदोलन के दौरान व्यापारियों को हुई क्षति में से अधिकांश की भरपाई गुड़गांव में 7-8 मार्च को होने वाले निवेशक सम्मेलन से हो जाएगी।

इस संबंध में चंडीगढ़ में एक अधिकारी ने दावा किया कि अब तक 1537 पीड़ित व्यापारियों को अंतरिम राहत के रूप में 20.04 करोड़ रुपये दिए जा चुके हैं।

ज्ञात हो कि हिंसा पीड़ित परिवारों में राज्य के वित्तमंत्री कैप्टन अभिमन्यु का परिवार भी है। उनके घर में लगातार तीन दिनों तक आग लगाई गई दर्जनों लग्जरी कारें जला दी गईं और जान बचाने के लिए उनके परिजनों को पड़ोस के घर में शरण लेनी पड़ी। बाद में उन्हें चार्टर्ड हेलीकॉप्टर से उठाकर चंडीगढ़ लाया गया।

आंदोलनकारियों को इतना से भी मन नहीं भरा तो कैप्टन के परिवार के एक पब्लिक स्कूल में भी आग लगा दी। और वहां खड़ी 18 स्कूल बसों को भी जला दिया। स्कूल की अध्यक्ष उनकी पत्नी एकता सिंधु हैं। सिंधु परिवार ने हरियाणा सरकार पर 25 करोड़ रुपये का दावा ठोका है।

आंदोलन के दौरान रोहतक के आसपास तीन अन्य स्कूलों (स्कॉलर्स रोजरी, पठानियां और श्रीराम ग्लोबल स्कूल) में भी आग लगा दी गई। नतीजा है कि इन स्कूलों में पढ़ रहे 1500 छात्रों की पढ़ाई बाधित हुई है। 

व्यापार और उद्योग से जुड़ा निकाय एसोचैम ने अनुमान लगाया है कि हिंसक आंदोलन के दौरान करीब 20 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति का नुकसान हुआ है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस। 

 

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