हरियाणा में शांति के बाद क्षति का आकलन

चंडीगढ़: हरियाणा में जाट आंदोलन थमने के बाद बुधवार को शांति बनी रही। हिंसा प्रभावित जिलों में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बहाल होने बाद रोजर्मे की चीजें खरीदने के लिए बड़ी संख्या में लोग अपने-अपने घरों से निकले। रोहतक, भिवानी, पानीपत, जिंद, सोनीपत और हिसार में जाट समुदाय के आंदोलनकारियों के प्रकोप से बचीं दुकानें बुधवार को खुलीं।

व्यापारी, कंपनियां और सरकारी अधिकारी जाट आरक्षण के चरम पर होने के दौरान राज्य में चल और अचल संपत्ति की हुई क्षति का आकलन कर रहे हैं। 

जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान अनेक सरकारी भवनों, निजी दुकानों, मॉल, शिक्षण संस्थानों और शोरूम में आंदोलनकारियों ने आग लगा दी थी। सैकड़ों दुकानें लूट ली गईं और आग के हवाले कर दी गईं।

विशेषज्ञों के मुताबिक, इस आंदोलन से करीब 20,000 करोड़ रुपये मूल्य की क्षति हुई।

इस बीच, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की राजनीतिक गतिविधियां हरियाणा की जगह दिल्ली में तेज हो गईं हैं, जहां हरियाणा के सभी सांसदों को केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री वेंकैया नायडू से मुलाकात के लिए बुलाया गया।

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर और कुछ अन्य मंत्री भी दिल्ली में डेरा जमाए हुए हैं।

वहीं, भारतीय राष्ट्रीय लोक दल (इनेलो) ने बुधवार को कहा कि जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान विवेकहीन हिंसा के लिए राज्य की भाजपा सरकार और कांग्रेस के नेता जिम्मेदार हैं।

इनेलो के एक नेता कहा, "पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के खिलाफ मामला दर्ज होना चाहिए, क्योंकि उनके घनिष्ठ सहयोगी वरिंदर सिंह एक ऑडियो टेप में लोगों को प्रेरित करने की कोशिश करते सुने जा रहे हैं।"  

इंडो-एशियनन्यूज सर्विस। 

 

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