हरियाणा का हिंसाग्रस्त इलाका लग रहा युद्ध क्षेत्र जैसा

रोहतक: हरियाणा के रोहतक शहर का मुख्य बाजार पिछले हफ्ते तक गुलजार था। मात्र तीन दिनों में यह उजाड़ लग रहा है। दुकानें और मॉल लूट लिए गए हैं और उन्हें आग के हवाले कर दिया गया है। पूरा इलाका युद्ध क्षेत्र जैसा लग रहा है क्योंकि सेना और सुरक्षा बलों के जवान गश्त लगा रहे हैं। 

देश की राजधानी से मात्र 75 किलोमीटर की दूरी पर स्थित रोहतक का बाजार हो या झज्जर या भिवानी, हरियाणा के हिंसाग्रस्त इलाके की इमारतें हों या बसें, सब ऐसी लग रही हैं जैसे वे युद्ध क्षेत्र में हैं।  

रोहतक के व्यवसायी राकेश गुप्ता कहते हैं, "इस हिंसा की वजह से व्यवसायियों का नुकसान सैकड़ों करोड़ तक पहुंच सकता है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में आरक्षण की मांग करने का यह कोई तरीका नहीं है। पिछले एक हफ्ते में हरियाणा पुलिस शायद ही कहीं दिखी है। लोगों को खुद को बचाने के लिए सरकार ने उन्हें अपने हाल पर छोड़ दिया है।" 

रोहतक, भिवानी, झज्जर, हिसार, जींद, कैथल, सोनीपत और पानीपत कुल आठ जिलों में सेना की तैनाती और रोहतक, झज्जर, भिवानी, हिसार, जींद और हांसी में कर्फ्यू लागू होने के बावजूद बलवाइयों ने रविवार को विशेष रूप से रोहतक और झज्जर के कई इलाकों में बवाल मचाया।

इस आंदोलन की अगुआई कर रहे सैकड़ों जाट युवक आगजनी और लूटपाट में शामिल हैं। वे मूर्खतापूर्ण ढंग से सरकारी और निजी संपत्तियों को बर्बाद करने वालों का नेतृत्व कर रहे हैं। जबकि, जाट आंदोलन का मकसद सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में अपने लिए ओबीसी कोटे के तहत आरक्षण की मांग करना है। 

रोहतक सिविल लाइन्स इलाके में रहने वाली गृहणी सरिता कुमारी ने बताया कि रोहतक शहर में सेना होने के बावजूद भीड़ ने कई दुकानें लूट लीं और उनमें आग लगा दी। किसी ने भी बलवाइयों को रोकने की कोशिश नहीं की। पूरी तरह अराजकता फैली हुई है। हम लोग पिछले चार दिनों से अपने घरों में बंद हैं। हमारे खाने-पीने का सामान तेजी से खत्म हो रहा है। 

जाट प्रदर्शनकारियों के साथ शामिल होकर गुंडे सरकारी और निजी संपत्तियों में आग लगा रहे हैं, वे बसें और निजी वाहनों को जला रहे हैं, सड़कों व राजमार्गो को जाम कर रहे हैं, ट्रेनों का परिचालन रोक रहे हैं और पटरियां उखाड़ रहे हैं। वे लूट और आगजनी में पूरी तरह लिप्त हैं। 

चाहे कुछ थाने, निर्जन रेलवे स्टेशन, राज्य परिवहन की बसें और निजी वाहन यहां तक कि ट्रेनों की बोगियों सहित कई जगहों पर चल-अचल संपत्तियों को जला दिया गया है। 

इससे प्रभावित लोग हरियाणा पुलिस को पिछले एक हफ्ते से कोई कार्रवाई नहीं करने के लिए जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। राज्य सरकार रक्षात्मक मुद्रा में है। 

चंडीगढ़ में हरियाणा पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने आईएएनएस को बताया कि बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारी और कर्मी जाट समुदाय से हैं। इसमें से बहुत सारे जाटों के खिलाफ कार्रवाई करने से इनकार कर रहे हैं क्योंकि यह उनके लिए एक भावनात्मक मामला है। इस मामले में पुलिस में दो फाड़ है। 

हरियाणा के गृह सचिव पीके दास ने कहा कि पुलिस को स्थिति नियंत्रण में करने के लिए कहा गया है। 

दास ने रविवार को मीडिया से कहा, "हमें जाट अधिकारियों द्वारा कार्रवाई नहीं करने की आशंका से अवगत कराया गया है। हम लोगों ने सभी अधिकारियों को इसके लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं। यदि वे कार्रवाई करने से इनकार करते हैं तो उन्हें कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।" 

प्रदर्शनकारियों ने पानीपत जिले के राजलु गरही में दिल्ली-अंबाला मार्ग पर रेल की पटरियां उखाड़ दी हैं। यह दिल्ली को उत्तर भारत से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण रेल मार्ग है। 

दिल्ली से 50 किलोमीटर दूर सोनीपत जिले में राजमार्ग संख्या-1 को जाम कर दिया गया। इससे इस व्यस्त मार्ग पर हजारों लोग और सैकड़ों वाहन फंस गए। 

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस

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