मोदी और हुड्डा की मुलाकातों से हरियाणा कांग्रेस में हलचल

कांग्रेस हाईकमान की ओर से हरियाणा की कमान हुड्डा खेमे को नहीं दिए जाने के परिणाम सामने आने लगे हैं। पिछले तीन वर्ष से एकजुटता का प्रदर्शन कर रहे हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा की एक हफ्ते में दो बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुलाकात ने हरियाणा की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। यह मुलाकात भले ही बेहद कम समय के लिए हुई है, लेकिन इसके राजनीतिक मायने काफी बडे़ निकल रहे हैं। कांग्रेस हाईकमान के लिए यह बड़ा संकेत है।  हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा पिछले करीब तीन वर्ष से विधायकों के माध्यम से हाईकमान पर इस बात के लिए दबाव बनाए हुए हैं कि हरियाणा कांग्रेस की बागडोर उन्हें ही सौंपी जाए। हुड्डा समर्थक विधायक कई बार खुलेआम कांग्रेस अध्यक्ष अशोक तंवर और विधायक दल की नेता किरण चौधरी को बदलने की मांग उठा चुके हैं। यह मामला लंबे समय से कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के दरबार में विचाराधीन है।

दूसरी तरफ हरियाणा में भारतीय जनता पार्टी से जाट समुदाय लगातार दूर हो रहा है। हरियाणा भाजपा के पास सत्ता में होने के बावजूद हुड्डा के बराबर सियासी कद वाले जाट नेता का अभाव है। हुड्डा प्रदेश की करीब 15 विधानसभा सीटों पर सीधा प्रभाव रखते हैं। पिछले तीन वर्षों में उनके खेमे का एक भी विधायक नहीं टूटा है। सूत्रों की मानें तो केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मध्यस्थता के चलते हुड्डा ने बड़ा सियासी दांव खेल दिया है। इसके अलावा हुड्डा के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अच्छे संबंध बताए जाते हैं। हुड्डा ने दिल्ली में दो बार प्रधानमंत्री से मुलाकात की है। एक मुलाकात संसद में हुई है जबकि दूसरी मुलाकात कहीं अलग स्थान पर हुई है। माना जा रहा है कि राहुल गांधी के फैसले का इंतजार कर रहे हुड्डा ने प्रधानमंत्री से मुलाकात करके कांग्रेस हाईकमान को बड़ा संकेत दे दिया है। इन मुलाकातों पर मुहर लगाते हुड्डा समर्थक राई के विधायक जयतीर्थ दहिया ने कहा कि हुड्डा और मोदी की मुलाकात महज शिष्टाचार भेंटवार्ता नहीं है। बल्कि इसके कई राजनैतिक मायने हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में यह बातचीत किसी नए राजनैतिक समीकरण को भी अंजाम दे सकती है।

 

दहिया ने कहा कि राजनीति में कुछ भी स्थाई नहीं होता है और कोई स्थाई विरोधी नहीं होता। दहिया ने कहा कि भाजपा हाईकमान लंबे समय से कद्दावर जाट नेताओं पर डोरे डाल रहा है। जब दो अलग-अलग दलों के वरिष्ठ नेता कहीं भी मिलते हैं, तो निश्चित तौर पर उनके बीच राजनैतिक चर्चा होती है। उन्होंने कहा कि हुड्डा व पीएम मोदी की मुलाकात का सवाल है, इसके भी कई राजनैतिक मायने हैं। उन्होंने कहा कि वे तो यहां तक मानते हैं कि यह पूरी तरह से राजनैतिक मुलाकात थी। दहिया ने कहा कि दोनों नेताओं ने एकांत में क्या बातचीत की, यह तो वही बता सकते हैं, लेकिन यह तय है कि यह शिष्टाचार भेंटवार्ता भर नहीं थी। दहिया ने कहा कि हरियाणा के मौजूदा हालात में वैसे भी भाजपा नेतृत्व प्रदेश के दिग्गज जाट नेताओं पर लगातार डोरे डाल रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले दिनों कांग्रेस के सारे विधायक बारी-बारी पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी और प्रदेश प्रभारी कमलनाथ से मिले थे। इसमें कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर को हटाने की बात वे रख चुके हैं। इसके बाद हुड्डा से भी राहुल गांधी ने बातचीत की थी। इस बातचीत में साफ हो गया था कि प्रदेश के संगठन में परिवर्तन किया जा रहा है।

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