कर्मचारियों की सेहत के लिए विशेषज्ञों की सेवा

गुड़गांव/नई दिल्ली, 25 मार्च (आईएएनएस)| बहुराष्ट्रीय कंपनियां कर्मचारियों में जीवनशैली से संबंधित रोगों के प्रसार को देखते हुए उनकी सेहत रक्षा के लिए विशेषज्ञों की सेवा ले रही है।

गुड़गांव के एक कॉलसेंटर में काम करने वाले 29 वर्षीय अतुल शर्मा ने मजाकिया लहजे में कहा, "मेरे पेट के चारों ओर बंधे टायर को हटाने की चिंता सिर्फ मुझे ही नहीं है, बल्कि मेरा बॉस भी इससे चिंतित है।"

ऐसा लगता है कि 'काम का हर्जा नहीं होना चाहिए' मंत्र के साथ 'कर्मचारियों का भी हर्जा नहीं होना चाहिए' मंत्र जुड़ गया है।

डायटीशियनों ने कहा कि मधुमेह, मोटापा, हृदयरोग के प्रसार को देखते हुए यह अच्छी बात है कि अब कंपनियां उन्हें कर्मचारियों के लिए स्वास्थ्य कार्यशाला और परामर्श सत्र के लिए बुलाती हैं।

नई दिल्ली के अपोलो अस्पताल में वरिष्ठ डायटीशियन दीपिका अग्रवाल ने आईएएनएस से कहा, "पिछले दो सालों में बहुराष्ट्रीय कम्पनियों द्वारा कार्यशाला और परामर्श सत्र के लिए बुलाने की घटना में 70 फीसदी वृद्धि हुई है।"

इस चलन का प्रमुख कारण यह है कि कर्मचारी यदि स्वस्थ्य नहीं रहेगा, तो काम प्रभावित होगा। इसलिए फजीफिल्म्स, सैमसंग या पार्क होटल जैसी कम्पनियां अपने कर्मचारियों को खान पान की स्वास्थ्य आदतों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए डॉक्टरों की सेवा ले रही हैं।

अग्रवाल ने कहा, "उदाहरण के लिए मैं अपने दो घंटे के सत्र में कर्मचारियों को बताती हूं कि रेस्तरां में किस तरह से ऑर्डर करें, जिससे स्वास्थ्य को नुकसान नहीं पहुंचे। हमारे पास हरा, पीला और लाल की अवधारणा है। लक्ष्य होता है कि लाल के दायरे से दूर रहें और हरा के करीब रहें।"

अवधारणा को थोड़ा और स्पष्ट करते हुए वह कहती हैं कि यदि आप चपाती के लिए कहती हैं, तो यह हरा के दायरे में आएगा। लेकिन यदि आप चपाती में मक्खन लगा लें या बटर नान के लिए ऑर्डर करें, तो यह पीले के दायरे में आएगा। इसी प्रकार भात और पुदीना की चटनी हरे के दायरे में आएंगे। काफी अधिक तले हुए और मीठे भोजन लाल के दायरे में आएंगे।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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