जल संकट से दो तरीके से उबरेगा गुड़गांव

नई दिल्ली: पानी की कमी से जूझ रहा गुड़गांव अपनी जरूरत का 50 प्रतिशत नालियों के जल को पुनशरेधन और वर्षा जल के संरक्षण से पूरा करेगा। सेंटर फॉर साइंस एंड इन्वायरमेंट (सीएसई) के कार्यक्रम निदेशक-जल, नित्य जैकब ने यह जानकारी दी है। सीएसई की हालिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए जैकब ने कहा कि जल तालिका के अनुसार गुड़गांव में हर वर्ष दो मीटर नीचे पानी खिसकता जा रहा है। इससे निपटने के लिए वर्षा जल संरक्षण और भूमिगत जल के पुनर्भरण के कदम अत्यंत गंभीरता से उठाए जाने चाहिए।

प्रिंसवाटरहाउस कूपर की कार्यकारी निदेशक रानेन बनर्जी ने कहा कि शहर में 30,000 से ज्यादा बोरिंग से रोजाना 86 एमएलडी (दस लाख लीटर रोजाना) भूमिगत जल का दोहन हो रहा है।

बनर्जी ने कहा कि 2005-6 से भूमिगत जल की मांग में वृद्धि 6 प्रतिशत से 70 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है।

जैकब और बनर्जी दोनों ही एक एनजीओ 'गुड़गांव फर्स्ट' की ओर से गुरुवार को यहां आयोजित 'गुड़गांव में जल संकट का समाधान' कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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