गुजरात हाई कोर्ट ने कहा- फेसबुक वाली शादियां नाकाम ही हो जाती हैं

 

गुजरात हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया के जरिये होने वाली शादियों पर एक टिप्पणी की है। अदालत ने कहा है कि फेसबुक के जरिये होने वाली शादियों का टूटना लगभग तय होता है। अदालत ने यह टिप्पणी घरेलू हिंसा के मामले की सुनवाई करते हुए दी। इस केस में एक जोड़े ने फेसबुक पर दोस्ती के बाद शादी कर ली थी। यह जोड़ा दो ही महीने सात रहा था कि इनके बीच तकरार शुरू हो गई। शादी को लेकर इस जोड़े का हसीन सपना बहुत कम वक्त में टूट गया, अब अदालत में तलाक और दहेज के लिए प्रताड़ना का केस चल रहा है। अदालत ने कहा कि इस नवविवाहित जोड़े अभी अपनी जिंदगी शुरू ही है और इनकी उम्र अभी बेहद कम है। अदालत ने टिप्पणी की कि इन्हें समहति से तलाक ले लेना चाहिए और जीवन को फिर से शुरू करना चाहिए। गुजरात हाई कोर्ट नवसारी के जयदीप और राजकोट के फंसी के मामले की सुनवाई कर रहा है। ये दोनों 2014 में फेसबुक के जरिये संपर्क में आए थे। इनके बीच प्यार हुआ और इन्होंने 8 फरवरी 2015 को शादी कर ली थी।

शादी के दो महीने बाद ही लड़की अपने ससुराल वालों का घर छोड़ दी और अपने ससुराल वालों और पति के खिलाफ दहेज मांगने, प्रताड़ना और धमकी का आरोप देकर केस दर्ज करवा दी। महिला पुलिस स्टेशन ने आईपीसी की धारा 498A, 323 और 504, और दहेज निषेध एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज किया। लड़के के ससुराल वालों ने गुजरात हाईकोर्ट में याचिका दी और इन आरोपों को रद्द करने की मांग की। इस पर सुनवाई के दौरान बुधवार (24 जनवरी) को जस्टिस परादीवाला ने टिप्पणी की, ‘ये आज के जमाने की वो शादी है जो फेसबुक पर तय हुई है इसलिए इसका टूटना लाजिमी है।’

जज ने यह भी कहा कि लड़के-लड़की ने सुलह की कई कोशिश कर ली लेकिन इसका कोई फायदा नहीं हुआ। अदालत ने फिलहाल लड़के के परिवार वालों के खिलाफ आरोपों को रद्द कर दिया है। जबकि पति के खिलाफ सुनवाई होती रहेगी। अदालत ने कहा कि शादी समाप्त होने के बाद वे नये सिरे से जिंदगी शुरू कर सकते हैं।

 

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