गुजरात चुनाव से पहले नया सियासी उबाल, सीएम रुपाणी ने कांग्रेस नेता अहमद पटेल पर लगाए गंभीर आरोप

अहमदाबाद: गुजरात चुनावों से पहले गुजरात में नया सियासी उबाल आ गया है. मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधीके राजनीतिक सलाहकार और पार्टी नेता अहमद पटेल पर सनसनीखेज आरोप लगाए हैं. रुपाणी ने कहा कि भरूच के अस्पताल से जुड़े रहे जिन कथित आईएस आतंकियों की गिरफ्तारी हुई है, अहमद पटेल इस अस्पताल के ट्रस्टी रहे हैं. ये कथित आतंकवादी इस अस्पताल में नियमित कर्मचारी थे. इतना ही नहीं दो दिन पहले ही अस्पताल प्रशासन ने उन दोनों से इस्तीफा मंजूर किया है. उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी व उपाध्यक्ष राहुल गांधी से मांग की है कि वो अहमद पटेल से इस्तीफा लें. 


वहीं, कांग्रेस पार्टी ने अपने वरिष्ठ नेता पर लगे आरोपों का जवाब देने में देरी नहीं की. कांग्रेस ने कहा कि पटेल पर लगे आरोप बेबुनियाद हैं. कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने पलटवार करते हुए ने सिर्फ बीजेपी के केंद्र और राज्य सरकारों पर कई आरोप लगा दिया और कहा कि चुनाव से पहले हताश बीजेपी अब ओछी राजनीति पर उतर आई है. सुरजेवाला ने हुए कहा कि अहमद पटेल ने अस्पताल से साल 2014 में इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद वह किसी भी तरह अस्पताल से नहीं जुड़े रहे. ऐसे में अगर कोई शख्स किसी आरोप में अब पकड़ा जाता है तो साल 2014 के अस्पताल के ट्रस्टी को जिम्मेगार कैसे ठहराया जा सकता है. एटीएस ने जिस उग्रवादी को पकड़ा है वो 5 महीने काम करने के बाद नौकरी छोड़कर चला गया था.

उन्होंने आगे कहा कि बीजेपी और रुपाणी अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए इस तरह का प्रयास कर रहे हैं. कांग्रेस का इतिहास उग्रवादियों को खिलाफ जंग से भरा हुआ है. उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि बीजेपी सरकार के नाक के नीचे से दाऊद की पत्नी भारत आकर चली जाती है और किसी को कानोंकान खबर नहीं होती. उन्होंने कहा कि अगर एटीएस के पास सबूत हैं, तो कार्रवाई करें लेकिन किसी सम्मानित कांग्रेस के नेता पर आरोप न लगाएं.

बीजेपी के प्रेस कॉन्फ्रेंस के थोड़ी ही देर बाद अस्पताल ने एक बयान जारी कर कहा कि आतंकी मोहम्मद कासिम को नियमानुसार जांच के बाद अस्पताल में नौकरी मिली थी और गिरफ्तारी से पहले ही  उसने अस्पताल से इस्तीफा दे दिया था. जिसे अस्पताल ने मंजूर भी कर लिया है. अस्पताल ने ये भी सफाई दी की अहमद पटेल या उनके परिवार के सदस्या अस्पताल में ट्रस्टी नहीं है.

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