गुजरात में भी तैयार हैं बीजेपी के 'पन्ना प्रमुख' यूपी में कारगर साबित हुई थी यह रणनीति

गांधीनगर: गुजरात विधानसभा चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस के बीच सीधी लड़ाई है.  16 सालों की सत्ता विरोधी लहर झेल रही बीजेपी के सामने और भी कई चुनौतियां हैं. एक तो पाटीदार आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल हर मंच से बीजेपी के खिलाफ ताल ठोंक रहे हैं. हाल ही में गौरक्षकों के उत्पात से दलित वर्ग भी खासा नाराज है और इसके भी युवा नेता उभर कर सामने आ रहे हैं और सबसे बड़ी बात गुजराती अस्मिता के नाम पर सभी गुजरातियों को एक कर देने का माद्दा रखने वाले नरेंद्र मोदी का चेहरा भी इस बार नहीं है. कांग्रेस इन्हीं के मौके को भुनाना चाहती है. लेकिन कैसे? कांग्रेस की रणनीति तो कहां है? यूपी में बीजेपी के प्रचंड बहुमत दिलाने वाले 'पन्ना प्रमुखों' की तैनाती यहां भी होगी. कांग्रेस इस बीजेपी की इस रणनीति का सामना कैसे करेगी?

कौन हैं यह 'पन्ना प्रमुख' : आम तौर पर सभी पार्टियां की रणनीति बूथ स्तर तक होती है. हर बूथ के लिए 3 से 4 कार्यकर्ता तैनात किए जाते हैं और इनका एक प्रमुख होता है जिसमें उनकी जिम्मेदारी होती है कि वह अपने बूथ में आने वाले सभी लोगों को वोट पार्टी के पक्ष में कर सकें. लेकिन उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने अपनी रणनीति बदल कर माइक्रो मैनेजमेंट पर काम किया और उसने बूथ प्रमुख की बजाए पन्ना प्रमुख बनाने का फैसला किया. इसमें एक गांव की वोटर लिस्ट के एक पन्ने को हर कार्यकर्ता को दी गई और कहा गया कि इस पन्ने में आने वाले सभी वोटरों को वोट दिलाने की जिम्मेदारी उसकी है. मतलब हर कार्यकर्ता को जिम्मेदारी दे दी गई और उस पन्ने में आने वाले सभी वोटरों को प्रतीकात्मक तौर पर उस कार्यकर्ता को नेता बना दिया गया. पूरे चुनाव में कार्यकर्ता अपना पन्ना लेकर घर-घर घूम  पार्टी की नीतियों का प्रचार करते रहे. अभी तक सभी पार्टियां बूथ प्रमुख बनाने की रणनीति पर ही काम करती हैं लेकिन इसमें कई बार बूथ प्रमुखों और उसके अंतर्गत कार्यकर्ताओं में ही मतभेद हो जाते हैं इसका नुकसान वोटिंग वाले दिन उठाना पड़ता है.

गुजरात में भी तैयार हैं पन्ना प्रमुख : गुजरात में 50128 पोलिंग बूथ हैं. एक बूथ पर बीजेपी के 15 से 20 पन्ना प्रमुख पन्ना तैनात किए जाएंगे. इस हिसाब से करीब 7 लाख पन्ना प्रमुख तैनात किए जाएंगे. हर पन्ना प्रमुख को लगभग 40 से 48 वोटरों की सूची दी जाती है. आपको बता दें कि 2012 से ही बीजेपी गुजरात में पन्ना प्रमुख को तैयार करने का काम रही है जो यहां पर पार्टी की नीतियों के प्रचार के साथ-साथ इन वोटरों को पोलिंग बूथ तक ले जाने का काम करेंगे.

दूसरी पार्टियों के पास नहीं है इतना बड़ा ढांचा : यह बात किसी से छिपी नहीं है कि गुजरात में संगठन को लेकर बीजेपी के आगे कोई भी पार्टी नहीं ठहरती है लेकिन अगर विधानसभा चुनाव जीतना है तो कांग्रेस को बीजेपी की इस चक्रव्यूह के खिलाफ रणनीति बनानी ही होगी. हालांकि राहुल गांधी गुजरात में कांग्रेस को मजबूत करने के लिए युद्ध स्तर पर कर रहे हैं इसका असर भी दिखना शुरू हो गया है लेकिन अभी पार्टी को बहुत मेहनत करना है. 

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