'मिशन गुजरात' के लिए राहुल गांधी ने बदले अंदाज, लेकिन क्या हवा का रुख बदल पाएंगे?

अहमदाबाद: गुजरात चुनावों से पहले राहुल गांधी ने  अपना पूरा जोर लगा दिया है. उनकी कोशिश जनता और जमीन से जुड़ने की है. ऐसे में सवाल है क्या इस बार के चुनावों में वे हवा का रुख बदलने में कामयाब रहेंगे? वहीं बीजेपी का कहना है कि राहुल अभी बच्चे हैं और सिर्फ रटा-रटाया भाषण पढ़ रहे हैं. गुजरात में राहुल गांधी लोगों से जुड़ने के नए तौर-तरीके अपना रहे हैं. चाहे वड़ोदरा में विद्यार्थी संवाद हो या छोटा उदयपुर में राठवा गेर समाज के साथ डांस. तीन दिनों के भीतर राहुल गांधी ने ये बताने की पूरी कोशिश की कि वे भी उन्हीं लोगों का हिस्सा हैं और उनकी समस्याओं को बखूबी समझते हैं. गुजरात दौरे पर गए राहुल बिल्कुल नए अंदाज में दिख रहे हैं. अपने पिछले दौरे में वो कई मंदिरों में गए. इस बार वह सामुदायिक कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहे हैं. छोटा उदयपुर में आदिवासियों के साथ उनकी लोकधुन पर थिरकते दिखे, तो दाहोद में एक मंदिर में भजन-कीर्तन में शामिल हुए.


दाहोद में एक रैली में मोदी सरकार को उद्योगपतियों की सरकार बताते हुए राहुल गांधी ने कहा कि इस सरकार में सिर्फ कुछ गिने-चुने लोगों को फायदा पहुंचाया जा रहा है और गरीबों को सिर्फ सपने दिखाए जा रहे हैं. राहुल ने कहा कि गुजरात में अंडरकरंट है और बीजेपी पूरी तरह हिल गई है. उन्होंने कहा कि ऊपर से शांति दिखाई दे रही है, लेकिन नीचे बीजेपी की टीम साफ हो गई है. राहुल ने कहा कि कुछ महीने बाद गुजरात में नई सरकार आएगी और वह सरकार पीएम के 'मन की बात' की सरकार नहीं होगी.

राहुल के बारे में एक छात्रा ने कहा कि हमें उन पर भरोसा है कि वह हमारी बात को समझेंगे. पर बड़ा सवाल ये है कि क्या लोग उन पर भरोसा करेंगे? बशीर अहमद 40 साल से कांग्रेस के कार्यकर्ता हैं. पान और पानी घर चलाते हैं. पिछले कई सालों से कांग्रेस के प्रदर्शन से मायूस थे, लेकिन इस बार कुछ उम्मीद जगी है. यह पूछे जाने पर कि क्या राहुल कुछ बदलाव ला पाएंगे, बशीर ने कहा, आदमी धक्का खाने से ही सीखता है, राहुल को बहुत झटके लगे हैं अब वह काम करना सीख गए हैं. कर्जन तालुका में हितेश पटेल की फोटोस्टेट की दुकान है. वह के बड़े समर्थक रहे, लेकिन उन्हें अब लगता है कि बदलाव का समय आ गया है. हितेश कहते हैं कि बीजेपी ने एक भी वादा पूरा नहीं किया, अब लोग बदलाव चाहते हैं.

सालों से मायूस कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में इस बार उम्मीद जगी है. चुनाव अभी दो महीने दूर हैं, लेकिन सरगर्मियां अभी से चरम पर पहुंचती जा रही हैं.

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