'गोमांस नहीं, मछली गोवा का पसंदीदा व्यंजन'

गोवा के पर्यटन मंत्री मनोहर अजगांवकर ने कहा है कि गोवा का सबसे पसंदीदा व्यंजन गोमांस नहीं, मछली है। इसलिए वध के लिए मवेशियों की खरीद-फरोख्त संबंधी केंद्र की अधिसूचना का तटीय राज्य के पर्यटन पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

आईएएनएस के प्रश्नों के लिखित उत्तर में अजगांवकर ने बुधवार को कहा कि वध के लिए मवेशियों की खरीद-फरोख्त पर रोक संबंधी केंद्र की अधिसूचना का अब तक गोवा में पर्यटन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है।

उन्होंने कहा, "गोवा जैसे सूरज, रेत और सर्फि ग के लिए जाना जाता है, उसी तरह यह मछली, करी और चावल के लिए भी जाना जाता है। पर्यटक गोवा के व्यंजनों खासतौर पर यहां की गोअन एक्सिट कोडी (मछली करी) और सी-फूड को बेहद पसंद करते हैं।"

अजगांव ने आईएएनएस से कहा, "यहां की पहली पसंद मछली है। इसके अलावा अन्य मांसाहारी व्यजंन दूसरी पसंद है। इसलिए पर्यावरण मंत्रालय की अधिसूचना का गोवा पर वास्तव में कोई प्रभाव नहीं पड़ा।"

पर्यटन उद्योग के हितधारकों, मांस व्यापारियों और विपक्ष द्वारा चिंता व्यक्त की गई है कि पशु बाजारों पर प्रतिबंध से गोवा में गोमांस की बिक्री प्रभावित हो सकती है।

अजगांवकर ने कहा कि गोवा में गोमांस की कोई कमी नहीं है और इस अधिसूचना से तटीय राज्य के पर्यटन में कोई कमी नहीं आई है।

उन्होंने कहा, "गोमांस की आपूर्ति वैसी ही है, जैसी अधिसूचना से पहले थी।"

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