लुइस बर्जर मामला : धन की हेराफेरी संबंधी जांच संभव

पणजी:  प्रवर्तन निदेशालय को गोवा के लुइस बर्जर रिश्वत मामले में धन की हेराफेरी का अंदेशा है, इसलिए इसकी जांच को इच्छुक है। इस मामले में राज्य के पूर्व लोक निर्माण विभाग मंत्री चर्चिल अलेमाओ को गिरफ्तार किया जा चुका है। प्रवर्तन निदेशालय के एक अधिकारी ने आईएएनएस को बताया कि केंद्रीय एजेंसी ने अपराध शाखा से प्राथमिकी की प्रति मांगी है। यह मामला गोवा के राजनीतिज्ञों तथा नौकरशाहों को साल 2010 में 976,630 करोड़ रुपये घूस दिए जाने से संबंधित है।

यह रिश्वत 1,031 करोड़ रुपये के जल तथा नाले के प्रबंधन की परियोजना के एवज में दी गई थी, जिस परियोजना को जापान इंटरनेशनल को-ऑपरेशन एजेंसी (जीआईसीए) धन मुहैया करा रहा है।

प्रवर्तन निदेशालय ने कहा, "हमें प्राथमिकी की प्रति नहीं मिली। हम इस बात का मूल्यांकन कर रहे हैं कि क्या इसको लेकर धन की हेराफेरी अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया जा सकता है या नहीं।"

वहीं, पुलिस का कहना है कि लोक निर्माण विभाग मंत्री चर्चिल अलेमाओ और तत्कालीन मुख्यमंत्री दिगंबर कामत ने कथित रूप से किश्तों में हवाला के जरिए लुइस बर्जर के पूर्व अधिकारियों से 2010 में सौदे के बदले में रिश्वत लिया।

अलेमाओ को बुधवार को गिरफ्तार किया गया, वहीं कामत से दो बार पूछताछ की जा चुकी है, तथा उन्हें अंतरिम जमानत मिल चुकी है। दोनों ने ही रिश्वत लेने की बात से इनकार किया है।

पुलिस ने जेआईसीए की परियोजना के पूर्व निदेशक अनन वाचासुंदर और अमेरिकी कंपनी लुइस बर्जर के प्रमुख (भारत) सत्यकाम मोहंती को भी गिरफ्तार किया है और उनका दावा है वे खाड़ी देशों से हवाला के जरिए दिल्ली, जयपुर और गोवा पैसा लाया करते थे।

गौरतलब है कि यहां भाजपा कार्यकर्ता को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने मुख्यमंत्री लक्ष्मीकांत पारसेरकर को इस मामले में जांच के लिए प्रवर्तन निदेशालय, आय कर विभाग और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) जैसी केंद्रीय एजेंसी से मदद दिलाए जाने का वादा किया था।

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