लुई बर्जर मामले में पर्रिकर पर उठी उंगली

New Delhi: Union Minister for Defence Manohar Parrikar addresses during the seminar on the ``Innovation and Indigenisation - Sailing towards Self Reliance``, in New Delhi on July 16, 2015. (Photo: IANS/PIB) New Delhi: Union Minister for Defence Manohar Parrikar addresses during the seminar on the ``Innovation and Indigenisation - Sailing towards Self Reliance``, in New Delhi on July 16, 2015. (Photo: IANS/PIB)

पणजी: आम आदमी पार्टी (आप) ने बुधवार को आरोप लगाया कि रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर जब गोवा के मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने लुई बर्जर कंपनी को एक ठेका दिया था, जबकि उन्हें इस अमेरिकी कंपनी की भ्रष्टाचार में संलिप्तता की पक्की जानकारी थी। आप ने मुख्यमंत्री लक्ष्मीकांत पारसेकर द्वारा लुई बर्जर को पिछले सप्ताह दी गई क्लीन चिट पर भी सवाल खड़े किए, जिस पर 2010 में गोवा के एक मंत्री और अधिकारियों को रिश्वत देने का आरोप है।

आप नेता वाल्मीकि नाईक ने मीडिया से कहा, "यदि पर्रिकर को लुई बर्जर के भ्रष्टाचार मामले के बारे में नेता प्रतिपक्ष रहते और उसके बाद मुख्यमंत्री रहते खास जानकारी थी तो उन्होंने इस बारे में क्यों कुछ नहीं किया? क्या करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार मामले की जानकारी को दबाकर रखना अपने आप में भ्रष्टाचार का मामला नहीं बनता है?"

नाईक, पर्रिकर द्वारा 19 जुलाई को की गई उस टिप्पणी का जिक्र कर रहे थे, जिसमें पर्रिकर ने संकेत दिया था कि इस मामले में दो मंत्री शामिल थे और यह सौदा दक्षिण गोवा के एक बंगले में हुआ था।

उल्लेखनीय है कि लुई बर्जर के शीर्ष अधिकारियों ने भारत, वियतनाम, इंडोनेशिया और कुवैत जैसे एशियाई देशों में ठेके हासिल करने के लिए 39 लाख डॉलर रिश्वत देने का दोष स्वीकार कर लिया है।

अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा घोषित दस्तावेजों में हालांकि रिश्वत स्वीकारने वाले राजनीतिज्ञों और अधिकारियों के नाम नहीं हैं, लेकिन दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि गोवा के एक मंत्री और अन्य अधिकारियों को 2009-10 में 976,630 डॉलर की रिश्वत दी गई थी।

जानकार सूत्रों ने कहा है कि गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री दिगंबर कामत और पूर्व लोक निर्माण मंत्री चर्चिल अलेमाओ रिश्वतखोरी मामले की जांच के दायरे में आ सकते हैं। कामत और अलेमाओ ने इस मामले में अपनी संलिप्तता से इंकार किया है।

लुई बर्जर उस कंर्सोटियम का हिस्सा थी, जिसने गोवा में अरबों डालर की एक जल एवं सीवरेज परियोजना के क्रियान्वयन का ठेका हासिल किया था। इस परियोजना को जापान इंटरनेशनल को-ऑपरेशन एजेंसी ने फंडिंग की थी।

लुई बर्जर को तकनीकी परामर्श का एक अन्य ठेका गोवा में सत्ताधारी भाजपा नेतृत्व वाली सरकार ने 2013 में दिया था। इस ठेके के तहत मोपा में एक हरित हवाईअड्डे के निर्माण में मदद करनी थी। लाखों डालर कीमत वाली यह परियोजना भी सवालों के घेरे में है।

आप ने इस पूरे मामले की जांच सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में सीबीआई से कराने की मांग की है। आप ने मुख्यमंत्री पारसेकर पर भी निशाना साधा है, जिन्होंने पिछले सप्ताह कहा था कि लुई बर्जर भ्रष्ट नहीं है, बल्कि उसके अधिकारी भ्रष्ट हैं।

नाईक ने सवाल किया, "मुख्यमंत्री किस आधार पर ऐसा कह रहे हैं। जब मामले की पुलिस जांच चल रही है, तो वह सर्टिफिकेट कैसे दे सकते हैं?"

गोवा पुलिस ने मंगलवार रात दर्ज एक प्राथमिकी में लुई बर्जर का नाम शामिल किया है। प्राथमिकी में शामिल अन्य आरोपियों में 'कुछ मंत्रियों' का जिक्र है।

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