गोवा रिश्वत कांड की जांच अपराध शाखा करेगी : पारसेकर

पणजी: गोवा पुलिस की अपराध शाखा एक अंतर्राष्ट्रीय परामर्श कंपनी की तरफ से राज्य के एक मंत्री और अधिकारियों को कथित रूप से दी गई 9,76,630 डॉलर की रिश्वत के मामले की प्रारंभिक जांच करेगी। मुख्यमंत्री लक्ष्मीकांत पारसेकर ने सोमवार को यह जानकारी दी।

पारसेकर ने संवाददाताओं से यहां कहा, "मैंने पुलिस महानिदेशक से बात की है और उनसे कहा है कि अपराध शाखा को प्रारंभिक जांच करने का निर्देश दिया जाए, जिसके आधार पर हम केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से संपर्क करेंगे।"

पारसेकर ने कहा कि वह रिश्वत के आरोप की सत्यता से सहमत हैं, क्योंकि यह आरोप अमेरिकी न्याय विभाग के दस्तावेजों में लगाई गई है।

न्यूजर्सी स्थित परामर्श कंपनी लुईस बर्जर के शीर्ष अधिकारी 39 लाख डॉलर रिश्वत देने का दोष पहले ही स्वीकार कर चुके हैं। यह रिश्वत भारत, वियतनाम, इंडोनेशिया और कुवैत जैसे देशों में ठेके हासिल करने के लिए दिए गए थे।

न्याय विभाग द्वारा घोषित दस्तावेज में हालांकि, उन राजनीतिज्ञों तथा अधिकारियों के नाम नहीं हैं, जिन्हें रिश्वत दी गई थी। दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि गोवा के एक मंत्री और अन्य अधिकारियों को 2009-10 के दौरान 9,76,630 डॉलर रिश्वत दी गई थी।

परामर्श दात्री कंपनी, उस कसोर्सियम का हिस्सा है, जिसे गोवा में जल तथा नालियों से जुड़ी परियोजना के क्रियान्वयन का ठेका मिला था।

रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने रविवार को कहा कि सिर्फ एक नहीं, बल्कि दो मंत्रियों ने रिश्वत ली थी, तथा रिश्वत का सौदा गोवा स्थित एक बंगले में हुआ था।

पणजी से कोई 35 किलोमीटर दूर मरगाव में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए पर्रिकर ने तत्कालीन मुख्यमंत्री दिगंबर कामत के कार्यकाल पर रोशनी डालते हुए कहा कि समझौता वित्त मंत्री की जानकारी के बिना नहीं हो सकता। 2010 में कामत के पास वित्त मंत्रालय की भी जिम्मेदारी थी, जबकि चर्चिल अलेमाओ लोक निर्माण विभाग के प्रमुख थे, जो राज्य में परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिए जिम्मेदार है।

हालांकि, कामत और अलेमाओ ने रिश्वत कांड में संलिप्तता से इंकार किया है।

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