गोवा : मंत्री एलिना ने की मुख्यमंत्री की आलोचना

पणजी: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और मुख्यमंत्री लक्ष्मीकांत पारसेकर द्वारा गोवा को विशेष राज्य का दर्जा दिलाए जाने की संभावना को खारिज कर दिए जाने पर राज्य में राजनीतिक तूफान खड़ा हो गया है। इस फैसले का एक मंत्री एलिना सल्दान्हा भी विरोध कर रही हैं।

विपक्ष जहां मामले पर भाजपा नीत राज्य सरकार की आलोचना कर रही है और केंद्र ने अपने वादे पर यू-टर्न ने लिया है, वहीं गोवा की एक मंत्री खुद अपने मुख्यमंत्री के खिलाफ विरोधियों के साथ खड़ी हो गई हैं।

वन एवं पर्यावरण मंत्री एलिना सल्दान्हा ने कहा कि पारसेकर का गोवा के विशेष राज्य की संभावनाओं को 'मृगमरीचिका' कहना उनका निजी बयान है, क्योंकि वह इस मामले में अपने पूर्ववर्ती मनोहर पर्रिकर जितने अनुभवी नहीं हैं।

एलिना ने कहा, "मुख्यमंत्री पारसेकर इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर जितने अनुभवी नहीं हैं। पर्रिकर को इस मुद्दे के अंदर-बाहर दोनों की जानकारी थी।"

अमित शाह ने पिछले सप्ताह दो-दिवसीय गोवा दौरे के दौरान संकेत दिए थे कि वह गोवा को तत्काल विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने के पक्ष में नहीं हैं, क्योंकि ऐसी मांग और राज्यों से भी शुरू हो जाएगी, वहीं पारसेकर ने रविवार को यह कहते हुए इसे खारिज कर दिया था कि यह मृगमरीचिका के पीछे भागने जैसा है।

एलिना के विरोध के कारण विपक्ष तथा सिविल सोसाइटी समूह को बल मिल गया है, जो सत्तारूढ़ पार्टी पर वर्ष 2012 के विधानसभा और वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान किए वादे से मुकरने का आरोप लगा रहे हैं।

गोवा विधानसभा में वर्ष 2013 में सर्वसम्मति से विशेष राज्य के दर्जे की मांग वाला प्रस्ताव पारित किया गया था।

गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) गोवा मूवमेंट फॉर स्पेशल स्टेटस के अध्यक्ष प्राजल सखारदंडे ने इस संबंध में कहा, "मुख्यमंत्री को यह याद रखे जाने की जरूरत है कि उन्होंने खुद प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए हैं। वह तब राज्य के स्वास्थ्य मंत्री थे। क्या उन्हें तब भी यह मृगमरीचिका ही लगती थी या अब लगने लगी है।"

मंत्री एलिना सल्दान्हा भी इस एनजीओ से जुड़ी हुई हैं।

पिछले कुछ वर्षो से गोवा में विशेष राज्य के दर्जे की मांग राजनीतिक एवं सामाजिक गलियारों में उठती रही है, जो कि तेज प्रवासन, सिकुड़ती जमीन और पहचान से जुड़ी चुनौतियों से जूझ रहा है।

वर्ष 2014 में सखारदंडे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चुनाव प्रचार के दौरान एक प्रतिनिधिमंडल के अध्यक्ष के रूप में उनसे मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन सौंपा था।

उन्होंने इस मुलाकात का जिक्र करते हुए कहा, "उस वक्त मोदी ने विशेष राज्य के दर्जे की हमारी मांग की सराहना की थी। लेकिन अचानक भाजपा के रवैये में बदलाव आ गया है।"

इधर, आम आदमी पार्टी (आप) प्रवक्ता ऑस्कर रेबेलो ने इस संबंध में कहा, "भाजपा नेता सिर्फ सांस्कृतिक पहचान की सुरक्षा पर अस्पष्ट बयान देती है, जबकि असली मुद्दे की अवहेलना करते हैं, जो कि जमीन से जुड़ी हुई है।"

मौजूदा समय में 12 राज्यों-अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, त्रिपुरा, मिजोरम, सिक्किम, जम्मू एवं कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और कर्नाटक के 12 जिलों को विशेष दर्जा प्राप्त है।

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