रायगढ़ वनक्षेत्र में हाथियों व शेर की दस्तक

रायगढ़, 24 मार्च (आईएएनएस/वीएनएस)। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के वन वन्य प्राणियों के लिए अब महफूज ठिकाना बनते जा रहे हैं। पिछले कई वर्षो से यहां के वनों में हाथियों ने अपना बसेरा बना लिया है। वहीं, अब इसी क्षेत्र में शेर की दहाड़ भी गूंजने लगी है। (18:40) 

बंगुरसिया क्षेत्र के ग्रामीणों का कहना है कि बंगुरसिया जंगल में एक के बाद एक, चार मवेशियों के अवशेष मिले हैं। इससे लगता है कि ये मवेशी किसी हिंसक पशु के शिकार बन गए। यहां शेर की मौजूदगी की खबर से वन महकमे के भी कान खड़े हो गए हैं।

रायगढ़ जिले के हरियाली से आच्छादित वन परिक्षेत्र और यहां मौजूद अनुकूल वातावरण ने हमेशा से वन्य जीवों को आकर्षित किया है। यही वजह है कि यहां के जंगलों में खरगोश से लेकर कई तरह के विलुप्तप्राय जीव जैसे उड़न गिलहरी, तेंदुआ और हाथी का बसेरा है।

यहां के वन सीमावर्ती राज्य उड़ीसा को छूती है। वहीं ये वन छत्तीसगढ़ के अन्य जिलों से भी जुड़े हुए हैं। अन्य जिले व राज्य के वन्यजीव यहां लंबे अरसे से आते-जाते रहे हैं। हाथियों ने तो यहां के जंगलों को जैसे स्थायी आवास ही बना लिया है। जिले के कई वन परिक्षेत्रों में हाथी छोटे व बड़े समूह में विचरते देखे गए हैं।

वन विभाग इस क्षेत्र को चाहे हाथी कॉरिडोर माने या न माने, मगर इन गजराजों ने इस क्षेत्र के सघन वनों को प्राकृतिक रूप से अपना बसेरा बना लिया है।

जिला मुख्यालय से लगभग 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित बंगुरसिया में अजीब सा वाकया सामने आया है। बीते एक माह के दौरान इसी गांव के रविशंकर पाव, नेहरू, शोभाराम, गोवर्धन व चतुर्भुज के मवेशियों की मौत यहां के जंगल में हो चुकी है।

ग्रामीणों की मानें तो पिछले एक माह के दौरान जंगल में मृत मिले मवेशियों के शव जिस अवस्था में मिले हैं, उसे देखते हुए इनका शिकार किसी हिंसक पशु ने किया है। ग्रामीणों का यह भी दावा है कि उन्होंने रात के समय कई बार घने जंगलों में शेर की दहाड़ सुनी है, जिसे देखते हुए ऐसा अनुमान है कि इन मवेशियों का शिकार शेर ने ही किया होगा।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

 

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