बिहार में अब पंडितों को लिखकर देना होगा, जिस लड़की की शादी करवाई, वह बालिग थी...

 बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने  शराबबंदी और नशाबंदी के बाद बाल विवाह और दहेज प्रथा के ख़िलाफ़ अभियान शुरू कर दिया है. इस अभियान के तहत राज्य में बाल विवाह पर अंकुश लगाने के लिये राज्य सरकार ने शादी कराने वाले पंडितों के लिए अनिवार्य कर दिया है कि उन्हें ये प्रशासन को लिखित देना होगा कि कन्या बालिग मतलब उसकी उम्र अठारह साल या उससे अधिक थी.

राज्य सरकार को उम्मीद है कि इससे बाल विवाह खत्म तो नहीं लेकिन उस पर बहुत हद तक अंकुश लगेगा. बिहार सरकार ने इस साल दो अक्टूबर से इस अभियान की शुरुआत की है. हालांकि सरकार का कहना हैं कि इसके अलावा और भी कई तरीक़ों ओर विचार किया जा रहा हैं जिसमें आधार कार्ड और जहां शादी हो रही हैं, वहां ख़ासकर कन्या का घर जहां हो वहां के वॉर्ड काउन्सलर से भी लिखित में ये अंडरटेकिंग लिया जाए. लेकिन, फिलहाल सरकार मानती है कि शुरुआत में पंडितों या शादी कराने वाले दूसरे पुजारियों से लिखित में लिया जाए.
वैसे हालांकि ये स्पष्ट नहीं हैं कि सरकार के इस आदेश के तहत मुस्लिम समुदाय के मौलाना या क्रिश्चयन समुदाय के पादरी पर भी क्या लागू होगा लेकिन फिलहाल राज्य में धार्मिक न्यास बोर्डों के जरिए पंडितो की सूची बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गयी हैं. 

बिहार में बाल विवाह एक सामाजिक कुरीति है जिसकी जड़ में राज्य की ग़रीबी और लोगों का पढ़ा- लिखा न होना है. हालांकि राज्य सरकार का दावा है कि इस मुद्दे पर जागरूकता के लिए कई क़दम उठाये गए हैं जिनमें जीविका के कार्यकर्ताओं द्वारा ग्रामीण इलाक़ों में लोगों के बीच जाके बाल विवाह के नकारात्मक असर के बारे में लोगों को बताना मुख्य काम हैं. राज्य सरकार ने इस मुद्दे पर अगले साल 21 जनवरी को एक मानव सृंखला का भी आयोजन किया है.

राज्य सरकार के अधिकारी भी मानते हैं कि जब तक राज्य में शिक्षा का विकास और ग़रीबी का उन्मूलन नहीं होता तब तक ना बाल विवाह और ना ही दहेज प्रथा ख़त्म होगी भले ही इसके नाम पर वसूली ज़रूर कुछ लोगों की बढ़ जाएगी. ये अधिकारी कहते हैं कि शराबबंदी के बावजूद आज शहर से लेकर गांव तक शराब की होम डिलीवरी हो रही है.

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