...जब नीतीश कुमार ने पार्टी नेताओं से कहा, 'अगर मैं मर जाऊं?'

पटना: बिहार के मुख्यमंत्री और जेडीयू के अध्यक्ष नीतीश कुमार ने अपनी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ एक बैठक में ऐसी बात कह दी, जिसे सुनकर सभी दंग रह गए. पिछले दिनों हुई इस बैठक में 66-वर्षीय नीतीश ने अचानक से सवाल कर दिया, 'अगर मैं मर जाऊं तो पार्टी का क्या होगा?' मुख्यमंत्री की इस बात से वहां मौजूद करीब 215 नेता एकदम भौंचक्के रह गए. हालांकि बाद में नीतीश ने अपनी बात को और साफ करते हुए कहा कि उनके कहने का मतलब यह है कि उनकी गैर-मौजूदगी में भी बिहार में सत्तारूढ़ जेडीयू अपने सिद्धांतों से डिगे नहीं और लोगों की सेवा से कभी पीछे नहीं हटे.

वैसे नीतीश कुमार पूरी तरह स्वस्थ हैं और वह रोजाना करीब 12 घंटे तक काम करते हैं. नीतीश के इस बयान पर बिहार प्रदेश जेडीयू अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा, 'नीतीश कुमार पूरी तरह स्वस्थ हैं. हमें अभी कम से कम अगले 10 सालों तक इस बात की चिंता नहीं है कि उनकी जगह कौन होगा. साथ ही मुख्यमंत्री की बात को सही संदर्भों में लिया जाना चाहिए. दरअसल उन्होंने पार्टी के सभी नेताओं से यह आग्रह किया कि वे और सक्षम बनें और अपना काम ईमानदारी से करें, जिससे उन्हें और बड़ी जिम्मेदारियां सौंपी जा सके.' हालांकि सूत्रों का कहना है कि जेडीयू के कुछ नेता नीतीश से अलग से जाकर मुलाकात करने का मन बना रहे हैं, ताकि वे उनसे आग्रह कर सकें कि मुख्यमंत्री खुद के बारे में ऐसी बात न कहें.

नीतीश कुमार ने जुलाई में महागठबंधन से नाता तोड़ते हुए बीजेपी का दामन हाथ लिया और राज्य में नई सरकार का गठन किया. उनके इस फैसले के बाद राजनीति में लंबे अरसे से उनके करीबी रहे शरद यादव नाराज हो गए और उन्होंने नीतीश के फैसले का खुलकर विरोध किया. वहीं कभी सरकार में सहयोगी रही आरजेडी आज नीतीश की सबसे मुखर विरोधी है.
आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव और उनके बेटे तथा पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव, सीएम नीतीश पर हमला करने का कोई मौका नहीं छोड़ते हैं. नीतीश भी आरजेडी नेता पर समय-समय पर पलटवार करने से परहेज नहीं करते हैं.

 

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