विधान परिषद चुनाव जिताने के बावजूद भाजपाई दोस्त को सभापति नहीं बनवा पाएंगे नीतीश कुमार

बिहार विधान परिषद की चार सीटों पर हुए चुनाव के नतीजे आते ही राज्य का सियासी पारा एक बार फिर चढ़ गया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के भाजपाई दोस्त और मौजूदा सभापति अवधेश नारायण सिंह भी विधान परिषद चुनाव जीत गए हैं मगर दोबारा उनके सभापति बनने पर संशय मंडरा रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री और राजद नेता राबड़ी देवी ने कहा है कि अब इस पद पर राजद कोटे से किसी विधान पार्षद को चुना जाना चाहिए। गौरतलब है कि भाजपा से होने के बावजूद नीतीश कुमार ने महागठबंधन धर्म से इतर जाकर अपने मित्र का समर्थन किया था और उनके खिलाफ अपनी पार्टी से कोई उम्मीदवार भी खड़ा नहीं किया था।

दरअसल, नीतीश कुमार चाहते हैं कि उनके मित्र अवधेश नारायण सिंह दोबारा सभापति बनें लेकिन राबड़ी देवी का बयान उनके लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है। उधर, एनडीए ने मुख्यमंत्री की तारीफ करते हुए उम्मीद जाहिर की है कि नीतीश कुमार उच्च आदर्शों की स्थापना करते हुए अवधेश नारायण सिंह को फिर से सभापति बनाएंगे। भाजपा ने चुनावों में अवधेश नारायण सिंह की जीत में मदद करने के लिए मुख्यमंत्री को धन्यवाद भी दिया है लेकिन राबड़ी देवी ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि सभापति पद पर उन्हें और उनकी पार्टी को अवधेश नारायण सिंह पसंद नहीं हैं। उधर, राबड़ी देवी के बेटे और उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने कहा है कि महागठबंधन के सभी नेता मिलकर सभापति पद पर फैसला कर लेंगे। एक बात और है कि फिलहाल बिहार विधान सभा अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी जदयू कोटे से हैं। लिहाजा, राबड़ी देवी ने विधान परिषद के सभापति का पद राजद कोटे को देने की वकालत की है।

इस बीच, जदयू प्रवक्ता नीरज सिंह ने कहा है कि नीतीश कुमार हमेशा से उच्च परंपरा को कायम रखने वाले व्यक्ति रहे हैं। इस बार भी वो उच्च परंपरा का निर्वाह करेंगे। उन्होंने कहा कि जब एनडीए की सरकार थी तब कांग्रेस के अरुण कुमार सभापति थे। उधर, कांग्रेस नेता रामचंद्र भारती ने भी अवधेश नारायण सिंह को सभापति बनाए रखने की बात कही है।

गौरतलब है कि गया स्नातक क्षेत्र से अवधेश नारायण सिंह चौथी बार चुनाव जीते हैं। चुनाव से पहले सभापति अवधेश नारायण सिंह ने अपने स्तर से बहुत प्रयास किया था कि सभी राजनीतिक दल मिल-बैठकर सर्वसम्मति से उन्हें उम्मीदवार घोषित कर दें लेकिन साफ दिल वाले राजनेता कहे जाने वाले लालू प्रसाद यादव ने कहा था कि ऐसा तभी संभव है जब सभापति महोदय राजद में शामिल हो जाएंगे। बतौर एक पत्रकार लालू ने कहा था, “मैं तो जीते जी कभी किसी सवाल पर भगवा फोर्स का समर्थन नहीं कर सकता हूं।”

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