लंबी कद-काठी वाले 15-20 लड़के की नजर रेल यात्री के जिस सामान पर पड़ी

बिहार में ट्रेनों से सफर करना किसी जोखिम से कम नहीं है। राजधानी पटना से सटे लखीसराय जिले के क्युल से आसनसोल, क्युल से भागलपुर और भागलपुर से साहिबगंज रेल खंड अपराधियों का पनाहगाह बना हुआ है। इस रेल खंड पर आए दिन अक्सर हत्या, लूट और छिनतई की वारदातें होती रहती हैं। जीआरपी और आरपीएफ के बड़े अफसर जमालपुर और भागलपुर में ही बैठते हैं फिर भी वारदातों पर काबू नहीं पाया जा रहा है। क्युल-आसनसोल रेल खंड पर अक्सर ट्रेन लूट की वारदातें होती रहती हैं, नक्सली भी इसका फायदा उठाते रहे हैं। अभी कुछ दिन पहले ही जमालपुर-हावड़ा ट्रेन संख्या 13072 में बिहार सैन्य बल (बीएमपी) का एक जवान सौरभ सफर कर रहा था। जमालपुर के बाद बरियारपुर स्टेशन पर जैसे ही ट्रेन रुकी, बदमाश एक महिला सिपाही का मोबाइल झपट्टा मार ले भागने लगा, यह देख सौरभ ट्रेन से कूद पड़ा और बदमाश को धर दबोचा लेकिन अपने साथी बदमाश को घिरता देख दूसरे बदमाशों ने गोली मारकर सौरभ को जख्मी कर दिया। फिर सभी फरार हो गए। शोर होने पर जीआरपी के जवानों ने सौरभ को पहले रेल अस्पताल जमालपुर और बाद में सदर अस्पताल मुंगेर में भर्ती कराया। हालत बिगड़ने पर डॉक्टरों ने उसे पटना रेफर कर दिया लेकिन पटना ले जाने के दौरान सूर्यगढ़ा के नजदीक ही उसकी मौत हो गई। वह उत्तर प्रदेश के बलिया ज़िले का निवासी था और औरंगाबाद सैन्य बल में सिपाही था। उसे सुल्तानगंज श्रावणी मेला में ड्यूटी के लिए डेपुटेशन पर भेजा गया था। सौरभ की हत्या एक तरह से रेल अधिकारियों के लिए खुली चुनौती है।

साहेबगंज से भागलपुर-क्यूल रेल खंड मालदा रेल डिवीजन में पड़ता है। मालदा से अक्सर अफसर आते रहते हैं मगर रेल खंड पर हो रहे अपराध की चर्चा कभी नहीं करते हैं और वाकया हो जाने पर सभी स्तर के अधिकारी दौड़ लगाते हैं। इस मामले में भी यही हुआ। रेल एसपी स्वनाजे मेश्राम और मुंगेर के एसपी आशीष भारती हत्या की वजह जानने बरियारपुर और सुल्तानगंज आए थे लेकिन असली अपराधी नहीं पकड़ा गया। हालांकि, यह कोई नई बात नहीं है। आम आदमी तो छोड़ दें तो खुद जीआरपी के जवान भी यहां संगीन साये में जीते हैं। भागलपुर रेलवे स्टेशन के 6 नंबर प्लेटफार्म पर कुछ महीने पहले शाम ढलते ही जीआरपी के एक जवान की हत्या कर दी गई थी। चेन, मोबाइल छीनने और पॉकेटमारी के किस्से तो यहां रोज की कहानी बन गई है।

दरअसल, बरियारपुर स्टेशन पर इन वारदातों को अंजाम देने वाला एक बड़ा गैंग सक्रिय है जो साहेबगंज से क्यूल के बीच अपना खेल करता है। इस गिरोह के लंबी कद-काठी वाले 15 से 20 लड़के एक साथ ट्रेन के डब्बे में सवार होकर मुसाफिरों का सामान गायब करते हैं। इनके काम में जो भी दखल देता है, उसे ये लोग मौत के घाट उतारने में तनिक नहीं हिचकते हैं। बीएमपी जवान सौरभ इसकी ताजा मिसाल हैं। चलती ट्रेन हो या इस रेल खंड का कोई भी स्टेशन, जिस यात्री के सामान पर इस गिरोह की नजर टिक गई उसे ये गायब या सरेआम छीनकर ले लेते हैं। जो इस गिरोह की हरकतों से वाकिफ है, वह तो चुपचाप तमाशबीन बना रहता है लेकिन जो नहीं जानता और बीच में उसने गलती से रोक-टोक कर दी तो उसकी खैर नहीं। बीते दिनों बरियारपुर बैंक ऑफ इंडिया के प्रबंधक की बरियारपुर स्टेशन पर ही इस गिरोह ने जमकर पिटाई की और लहूलुहान कर स्टेशन पर छोड़ गए। तब डर से उनकी मदद को कोई नहीं आया। घंटों कराहते वहीं पड़े रहे। काफी देर बाद दूसरी ट्रेन आने पर दूसरे लोगों ने ही चढ़ाया। ये भागलपुर से रोजाना नौकरी करने बरियारपुर जाते हैं।

दिलचस्प बात यह है कि इस गिरोह की करतूतें सभी को पता हैं लेकिन कोई हाथ डालने की जुर्रत नहीं करता। इसकी वजह जानकार मिलीभगत बताते हैं। एक बात तो तय है कि साहेबगंज से लेकर क्यूल तक जीआरपी थाने के तैनात अफसर ट्रेनों में बोरी और पोटली की तलाश में रहते हैं। अब तो नीतीश सरकार ने इनकी कमाई में इजाफा का और मौका दे दिया है। शराबबंदी से इनकी पांचों अंगुली घी में है। अवैध वेंडरों और स्टेशनों पर लगी अवैध दुकानों और गलत धंधेबाज इनकी मोटी कमाई का जरिया है। अब तो आरपीएफ भी इनके कान काट रही है। ऐसे में रेलवे में अपराध पर लगाम लगे तो कैसे। इतना ही नहीं रात के 10 बजे के बाद बरियारपुर स्टेशन पर वहां का वाशिंदा भी उतरना नहीं चाहता। या तो वह जमालपुर स्टेशन या फिर आगे भागलपुर स्टेशन पर रात गुजारना ज्यादा मुनासिब समझता है। यह गिरोह सालों से सक्रिय है और मुसाफिरों से लूट-खसोट इनका पेशा बना है। अब ये ज्यादा हिंसक हो गए हैं। इसे कानून की नजर से डाका डालना भी कह सकते हैं।

यानी क्यूल-भागलपुर और साहेबगंज रेल खंड पर सफर करना ख़ौफ़ से भरा है। ट्रेनों की चेन कब कहां खींचकर रोक दी जाएगी किसी को पता नहीं। ट्रेन की खिड़की के पास बैठी महिलाओं के कान के झुमके और गले की चेन और हाथों से मोबाइल झपट कर ले भागने की वारदात तो रोजाना ही होती है। इस दौरान इन्हें चोट भी लगती हैं। मगर मुसाफिरों की हिफाजत का किसी का ध्यान नहीं है। यात्री संघ ने इस ओर बड़े अधिकारियों को गौर फरमाने के लिए ज्ञापन भी दिया फिर भी कोई फर्क नहीं पड़ा। पता नहीं “प्रभु जी” का ध्यान इस रेल खंड पर कब पड़ेगा?

  • Agency: IANS