सहरसा : अनुकंपा नौकरी पाने के लालच में बेटे ने पिता की हत्या करा दी

सहरसा: सहसा यह विश्वास नहीं होता, लेकिन ऐसा हुआ है. एक पुत्र ने अनुकंपा की नौकरी के लालच में अपने ही पिता की हत्या करवा दी. हत्या की साजिश रचने में उसकी पत्नी भी शामिल थी. हत्या करने वाला भी कोई और नहीं, बल्कि उस पुत्र का अपना साला था.

नौकरी पाने के लालच में पुत्र ने ही तेज धारदार हथियार से अपने पिता का गला रेतवा दिया और उन्हें मारकर हमेशा के लिए अपना रास्ता साफ कर लिया. यह घटना बिहार के सहरसा जिले की है.

सहरसा शहर से सटे कहरा गांव निवासी शंकर झा की हत्या की उलझी गुत्थी पुलिस ने सुलझा ली है. शंकर झा सुपौल समाहरणालय में अल्पसंख्यक कल्याण शाखा में वरीय लिपिक के पद पर कार्यरत थे. 31 जनवरी 2017 को वे सेवानिवृत्त होने वाले थे. वह रोज अपने गांव से ही सुपौल जाया-आया करते थे. गत तीन दिसंबर को देर रात में सुपौल से सहरसा आते हुए उनकी हत्या कर शव को नहर में फेंक दिया गया.अगली सुबह लाश मिलने की खबर फैलते ही शहर में कोहराम मच गया. लोगों ने लाश के साथ शहर के शंकर चौक पर जाम होकर आगजनी की और सरकार सहित प्रशासन के विरोध में खूब नारे लगाए.  

बेटे और बहू ने रची थी साजिश
शंकर हत्याकांड का खुलासा करते हुए पुलिस कप्तान अश्विनी कुमार ने बताया कि सबसे पहले शंकर झा के पुत्र दिनकर के मोबाइल का सीडीआर खंगाला गया जिसमें हत्या से कई दिन पूर्व से लेकर हत्या की रात व उसके बाद भी एक खास नंबर पर बात करने की बात सामने आई. उस व्यक्ति के बारे में पता करने पर पता चला कि वह दिनकर का साला दीपक है. दीपक बिहार पुलिस में सिपाही है और खगड़िया में जज का बॉडीगार्ड है.

पुलिस ने अन्य बिंदुओं पर तफ्तीश करते हुए हत्या में शामिल व घटना स्थल पर मौजूद दीपक के मित्र निखिल को दबोचा. निखिल ने हत्याकांड के सारे घटनाक्रम का खुलासा कर दिया. निखिल की निशानदेही पर ही हत्या में प्रयुक्त किए गए तेज धारदार हथियार को भी बरामद कर लिया गया. हालांकि अब तक दीपक सहित पुत्र दिनकर एवं बहू पूजा की गिरफ्तारी नहीं हुई है. लेकिन पुलिस तीनों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही है.

बाइक खराब होने का बनाया बहाना
एसपी ने बताया कि तीन दिसंबर को दीपक सुपौल पहुंचा और अपने मित्र निखिल से शाम को खगड़िया चलने को कहा. देर शाम निखिल और दीपक अपने बहनोई के पिता शंकर झा को साथ लेकर दो बाइक से सहरसा के लिए चल दिए. लगभग 25 किलोमीटर चलने के बाद तीनों बिहरा में चाय पीने के लिए रुक गए. थोड़ी देर वहां रुकने के बाद फिर आगे बढ़े. सिहौल के करीब पहुंचने के बाद दीपक ने बाइक खराब हो जाने की बात कही और गाड़ी रोक दी. जानबूझकर समय बिता रहे दीपक को सुनसान होने का इंतजार था. तब तक रात के दस-साढ़े दस बज चुके थे. तीनों चलने ही वाले थे कि शंकर झा ने लघुशंका करने की बात कही. वह ज्यों ही सड़क के किनारे गए. पीछे से दीपक ने कमर से दबिया निकालकर शंकर का गला रेत दिया और शरीर पर जगह-जगह हथियार चलाकर उनकी जान ले ली. फिर दोनों ने मिलकर लाश को वहीं नहर के किनारे फेंक दिया. सहरसा पहुंचकर कपड़े बदलने के बाद दोनों खगड़िया के लिए निकल पड़े.

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