गोगोई चाय उद्योग को चंदा वापस करेंगे

गुवाहाटी : असम सरकार ने लगभग 25 चाय कंपनियों द्वारा मुख्यमंत्री राहत कोष में दिए गए लगभग 15 लाख रुपये का चंदा वापस करने का फैसला किया है और कहा है कि यह राशि कंपनियों के मुनाफे की तुलना में बहुत कम थी। मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने कम चंदे पर नाराजगी जताते हुए संबंधित विभाग को इन कंपनियों द्वारा भेजे गए चेक वापस करने के निर्देश दिए हैं।

गौरतलब है कि 25 चाय कंपनियों ने हाल ही में राहत कोष में 1,522,537 रुपये का चंदा दिया था।

मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि ये सारी कंपनियां भारतीय चाय एसोसिएशन (आईटीए) की सदस्य हैं, जिनमें असम चाय उद्योग के रोजेल टी, गुड्रिक, अमगुरी इंडिया लिमिटेड और वारेन टी लिमिटेड जैसी नामी कंपनियां भी शामिल हैं।

गोगोई ने कहा, "ये कंपनियां असम में व्यवसाय करते हुए बहुत लाभ कमा रही हैं, लेकिन वे असम के विकास में योगदान नहीं करना चाहती।"

मुख्यमंत्री राहत कोष आमतौर पर कैंसर पीड़ितों की मदद पर खर्च किया जाता है, इसके साथ ही यह प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित गरीबों और जरूरतमंदों की मदद भी करता है।

उद्योग मंत्री प्रद्युत बारदोलोई ने हाल ही में कहा था कि कुछ बड़ी कंपनियों सहित असम की कंपनियां गुवाहाटी चाय नीलामी केंद्र (जीटीएसी) को दरकिनार कर अपने उत्पाद देश के अन्य हिस्सों के नीलामी केंद्रों को बेच रही हैं जिससे राज्य सरकार को भारी नुकसान हुआ है।

हालांकि असम में देश के कुल चाय उत्पादन का 55 प्रतिशत उत्पादन होता है, लेकिन जीटीएसी के माध्यम से मात्र 27 प्रतिशत चाय बेची जाती है।

पिछले साल देश में हुए कुल 1,132 करोड़ किलोग्राम चाय उत्पादन का 55 प्रतिशत असम का था, जबकि जीटीएसी से मात्र 116 करोड़ किलोग्राम चाय बेची गई थी, जिससे राज्य को 20 करोड़ रुपये की हानि हुई।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

POPULAR ON IBN7.IN