समुद्र तटीय पर्यटन को बढ़ावा देगा आंध्र प्रदेश

पणजी: आंध्र प्रदेश बंगाल की खाड़ी के किनारे तटीय गलियारे और आठ तटीय क्षेत्रों का विकास कर बीच पर्यटन क्षेत्र में अपनी अलग पहचान कायम करना चाहता है।

क्या आंध्र प्रदेश गोवा की नकल करते हुए समुद्र तटीय पर्यटन को बढ़ावा देना चाहता है? इस विषय पर आंध्र प्रदेश के पर्यटन और पुरातत्व विशेष सचिव चंदना खान ने कहा कि ऐसा नहीं है।

खान ने आईएएनएस से ईमेल साक्षात्कार में कहा, "गोवा की अलग पहचान है। दो अलग-अलग पहचान की तुलना करना ठीक नहीं है।"

खान ने कहा कि आंध्र प्रदेश को गोवा की तरह अपने समुद्र तटों की तरफ लोगों को आकर्षित करने के लिए शराब परोसने की जरूरत नहीं है।

खान ने कहा, "हम अपने समुद्र तट को बढ़ावा देने के लिए शराब के उपयोग पर टिप्पणी नहीं करना चाहते हैं। हम मानते हैं कि हमारे समुद्र तटों की प्राकृतिक सुषमा पर्यटकों को आकर्षित करेगी।"

आंध्र प्रदेश के पास 970 किलोमीटर क्षेत्र में फैला समुद्र तट है, जो लगभग अनछुआ है। राज्य सरकार सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से समुद्र तटों के विकास पर 1,000 करोड़ रुपये खर्च करना चाहती है। इसके अलावे केंद्र सरकार के पर्यटन मंत्रालय ने पहले ही 221 करोड़ रुपये जारी कर दिए हैं।

खान ने कहा, "तटीय क्षेत्रों और समुद्र तटों का विकास हमारी योजना का केंद्रीय हिस्सा है। इसे देखते हुए विशाखापट्टनम को भीमुनीपट्टनम से जोड़ने के लिए एक अलग तटीय गलियारे का विकास किया जा रहा है।" उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश पर्यटन विकास निगम नौ समुद्र तटों का विकास करेगा।

खान ने कहा कि समुद्र तटों की ओर आम आदमी का ध्यान आकर्षित करने के लिए राज्य पर्यटन मंत्रालय सांस्कृतिक समारोह के माध्यम से भी समुद्र तटों को बढ़ावा देगा।

उन्होंने कहा कि विशाखापट्टनम की तरफ विशेष ध्यान दिया जाएगा और इसे घरेलू पर्यटकों के बीच ही नहीं बल्कि वैश्विक पर्यटकों के बीच भी एक महत्वपूर्ण गंतव्य बनाया जाएगा।

खान ने हालांकि समुद्र तटों के निजीकरण की योजना से इंकार किया।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

 

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