आंध्र में कांग्रेस सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव गिरा

हैदराबाद, 16 मार्च (आईएएनएस)| आंध्र प्रदेश में सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी विपक्ष के बंटे होने की वजह से 16 महीने के अंदर दूसरी बार अविश्वास प्रस्ताव के दौरान सरकार बचाने में कामयाब रही है। लेकिन परिणाम से साबित होता है कि सरकार तकनीकी रूप से अल्पमत में है। मुख्य विपक्षी दल तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) तटस्थ रही तथा 27 सदस्यों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। केवल 58 विधायकों ने तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) द्वारा पेश किए गए अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया। विधानसभा अध्यक्ष ने दो सदस्यों को मतदान की अनुमति नहीं दी।

विधानसभा के 293 सदस्यों में से 142 ने इस अविश्वास प्रस्ताव का विरोध किया। इस तरह कांग्रेस आधी सदस्य संख्या तक न पहुंचकर तकनीकी रूप से अल्पमत में आ गई है। सदन की वास्तविक क्षमता 295 है।

15 घंटे तक चली बहस के बाद शनिवार तड़के एक बजे हुए मतदान के दौरान तेदेपा के सात और कांग्रेस के नौ विधायकों ने पार्टी व्हिप का उल्लंघन करते हुए प्रस्ताव का समर्थन किया।

इन विधायकों द्वारा वाईएसआई कांग्रेस के प्रति समर्थन जाहिर करने से कांग्रेस की सदस्य संख्या 155 से 146 हो गई, और तेदेपा की सदस्य संख्या 85 से घटकर 79 हो गई।

तेदेपा प्रमुख एन.चंद्रबाबू नायडू सदन से अनुपस्थित रहने वाले पार्टी के 15 विधायकों में शामिल थे।

टीआरएस (17), वाईएसआर कांग्रेस (17), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (चार), भारतीय जनता पार्टी (तीन),मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (एक), एक निर्दलीय तथा कांग्रेस और तेदेपा के 15 विद्रोही विधायकों ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया।

कुछ महीने पहले सरकार से समर्थन वापस लेने वाली मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (सात) भी मतदान से अलग रही।

इसे नैतिक जीत बताते हुए टीआरएस और वाईएसआर कांग्रेस ने तेदेपा के कांग्रेस से मिल जाने का आरोप लगाया।

टीआरएस के हरीष राव ने कहा, "सरकार अल्पमत में आ चुकी है और इसे सत्ता में रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।"

वाईएसआर कांग्रेस के बी.करुणाकर रेड्डी ने कहा, "इस प्रस्ताव ने तेदेपा की पोल खोल दी है, जो सरकार को बचाने के लिए कांग्रेस से मिल गई है।"

इससे पहले, चर्चा के दौरान जवाब देते हुए मुख्यमंत्री किरण कुमार रेड्डी ने कहा था कि दोनों पार्टियों ने स्थानीय निकाय में हार के डर से अविश्वास प्रस्ताव पेश किया।

उन्होंने कहा था कि कांग्रेस मजबूती के साथ उभरेगी और 2014 के आम चुनाव में अत्यधिक सीटें हासिल करेगी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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