हैदराबाद में कड़ी सुरक्षा के बीच जारी है गणपति विसर्जन

हैदराबाद और तेलंगाना के विभिन्न हिस्सों में मंगलवार को कड़ी सुरक्षा के बीच गणपति विसर्जन हो रहा है। यह विसर्जन 11 दिन के गण्ेाश महोत्सव के समापन पर होता है। हैदराबाद और सिकंदराबाद को विभाजित करने वाली झील हुसैन सागर में भगवान गणेश की हजारों प्रतिमाओं को विसर्जित किया गया।

विसर्जन के दौरान शांति बनाए रखने के लिए 27,000 सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है। विसर्जन में 15 लाख लोगों के भाग लेने की संभावना है।

पिछले साल तक हुसैन सागर में सबसे बड़ी प्रतिमा को अंत में विसर्जित किया जाता था। इस बार पुलिस ने विसर्जन की प्रक्रिया को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए आयोजकों को सबसे बड़ी प्रतिमा को सबसे पहले विसर्जित करने के लिए मना लिया। 57 फुट लंबी प्रतिमा को विसर्जित करने के लिए विशाल क्रेनों का इस्तमाल किया गया।

अधिकारियों ने विसर्जन के लिए 23 जल निकायों में 51 स्थैतिक क्रेन सहित कुल 159 क्रेन भेजे हैं। हुसैन सागर में 5,000 मूर्तियों के विसर्जित होने की संभावना है जिसके लिए ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम (जीएचएमसी) ने अन्य विभागों के साथ मिलकर 27 क्रेन की व्यवस्था की है।

ग्रेटर हैदराबाद के महापौर बी. राममोहन ने कहा कि हुसैन सागर को प्रदूषण से बचाने और समारोह के जल्दी समापन के लिए सरकार ने 21 करोड़ की लागत से विशेष पोखरे बनवाए हैं। इनमें सोमवार तक छह हजार प्रतिमाएं विसर्जित की गईं।

तेलंगाना के पुलिस महानिदेशक अनुराग शर्मा ने कहा कि राज्य में कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए हैदराबाद और अन्य शहरों में विस्तृत सुरक्षा व्यवस्था की गई है। पूरे तेलंगाना में 95,000 प्रतिमाओं को पुलिस के पास पंजीकृत कराया गया है।

हैदराबाद के पुलिस आयुक्त एम महेंद्र रेड्डी ने कहा कि 15,000 सीसीटीवी कैमरों और 800 वीडियो कैमरों के जरिये जुलूसों की निगरानी हो रही है। इसके अतिरिक्त वह खुद हवाई सर्वेक्षण भी करेंगे।

विसर्जन का मुख्य जुलूस सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील पुराने शहर से गुजरेगा, पुलिस ने इन इलाकों में सुरक्षा कड़ी कर दी है। चारमीनार के निकट स्थित मक्का मस्जिद के पास मुख्य रूप से सुरक्षा कड़ी की गई है। जुलूस की निगरानी के लिए मुख्य नियंत्रण कक्ष चारमीनार के पास स्थापित किया गया है।

16 बम निरोधक दस्तों को तैनात किया गया है। विशिष्ट माओवादी विरोधी बल ग्रेहाउंड और आतंकवाद विरोधी इकाई ऑक्टोपस के कर्मियों को किसी भी प्रकार की आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए 'स्टैंड बाई' पर रखा गया है।

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