भू-सूचना तकनीक से पकड़ी जाएगी मनरेगा में हुई धांधली

हैदराबाद, 24 मार्च (आईएएनएस)| केंद्र सरकार ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना में हुई धांधली का पता लगाने के लिए व्यापक तौर पर भू-सूचना विज्ञान तकनीक या उपग्रहों का उपयोग करने की योजना बना रही है।

सरकार को महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में गंभीर एवं बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार की शिकायतें मिली हैं, जिसमें पहले से हुए कार्यो को नए कार्य के अंतर्गत प्रस्तुत किए जाने जैसे मामले भी हैं। उपग्रहों के माध्यम से इस तरह के भ्रष्टाचार को पकड़ने में सहायता मिलेगी।

हैदराबाद स्थित राष्ट्रीय ग्रामीण विकास संस्थान (एनआईआरडी) में ग्रामीण विकास के लिए भू सूचना विज्ञान अनुप्रयोग केंद्र (सी-गार्ड) द्वारा इस उद्देश्य से संवर्धित भू-सूचना विज्ञान अनुप्रयोग को विकसित किया गया है।

सी-गार्ड के अध्यक्ष वी. माधव राव ने कहा, "हमें मनरेगा में भ्रष्टाचार से संबंधित ढेरों शिकायतें मिलीं। कई मामलों में तो पुराने कार्यो को नए कार्य के अंतर्गत प्रस्तुत कर दिया गया।"

हाल ही में एक संवाददाता सम्मेलन में राव ने कहा, "उपग्रह से लिए गए चित्रों का इस्तेमाल करने वाले संवर्धित भू सूचना विज्ञान का प्रयोग करके कोई भी सामान्य व्यक्ति निर्माण कार्य के नए या पुराने होने की बात जान सकता है। यह प्रणाली पूर्ण विश्वसनीय है तथा किसी भी तरह के भ्रष्टाचार का पता लगाने में बेहद प्रभावी है।"

राव ने आगे कहा कि आंध्र प्रदेश में विभिन्न ग्रामीण विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन तथा सामग्रियों एवं संपत्ति का निरीक्षण करने में इस प्रणाली के सफल प्रयोग के कारण अधिकारियों ने इसे गंभीरता से लेना शुरू कर दिया।

राव ने कहा, "इस प्रणाली के उपयोग से ग्रामीण विकास मंत्रालय के अधिकारी बेहद प्रसन्न हैं तथा उन्होंने इस प्रणाली को पूरे भारत में चल रही योजनाओं के निरीक्षण में उपयोग करने की इच्छा प्रकट की।"

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा इस परियोजना को एक बार हरी झंडी दे दिए जाने के बाद पूरे भारत में बड़ी संख्या में भू-सूचना विज्ञान केंद्रों की स्थापना की जाएगी। इस पर 17 करोड़ रुपये लागत आने का अनुमान है।

राव ने बताया कि एनआईआरडी पंचायत अधिकारियों को ग्रामीण विकास के प्रति जागरूक करने तथा सुझाव प्रदान करने के लिए परस्पर संवाद स्थापित करने योग्य दूरस्थ शिक्षा कक्षाओं की शुरुआत करने की योजना पर काम कर रही है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस

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