शोध का दावा, वायग्रा की मामूली खुराक रोक सकती है जानलेवा बीमारी

एक नए अध्ययन में इस बात का दावा किया गया है कि पुरुषों में इरेक्टाइल डिसफंक्शन के इलाज के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला वायग्रा कैंसर से लड़ने की क्षमता रखता है। इकैनसर्मेडिकल साइंस द्वारा किए गए इस क्लिनिकल रिसर्च में इस बात का दावा किया गया है। रिसर्च में कहा गया है कि वायग्रा को एंटी-कैंसर दवाओं में शामिल किया जा सकता है। शोधकर्ताओं ने बताया कि वायग्रा की रोजाना खुराक लेने से जानलेवा बीमारी कोलोरेक्टल कैंसर से बचा जा सकता है। अमेरिका स्थित ऑगस्ट यूनीवर्सिटी में हुए एक अध्ययन में इस बात का दावा किया गया है।

शोधकर्ताओं ने चूहों पर किए गए अपने अध्ययन के बाद इस बात का खुलासा किया। शोध के दौरान पानी में वायग्रा डालकर चूहों को दिया गया जिसके बाद उनमें ट्यूमर काफी मात्रा में कम हो गया। यह शोध कैंसर प्रीवेंशन रिसर्च नाम के एक जर्नल में प्रकाशित किया गया था। अब इस शोध को उन लोगों पर करने की तैयारी है जिनमें कोलोरेक्टल कैंसर का खतरा सबसे ज्यादा होता है।

क्या होता कोलोरेक्टल कैंसर – इसे मलाशय का कैंसर कहा जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार फेफड़ों के कैंसर के बाद यह दुनिया भर में होने वाला दूसरा आम कैंसर है। मलाशय में मौजूद अडेनोमाटोस पॉलिप्स नाम की कोशिकाएं धीरे-धीरे गुच्छे बनाने लगती हैं। हालांकि शुरुआत में यह कैंसर मुक्त होती हैं लेकिन समय के साथ इनमें से कुछ पॉलिप्स कोलोरेक्टल कैंसर बन जाते हैं। आंत की परत पर कोशिकाओं के गुच्छे (पॉलिप्स) बन जाते हैं. ये गुच्छे कैंसर का रूप ले सकते हैं। पॉलिप्स अक्सर छोटे होते हैं और शुरुआत में इनके लक्षण दिखाई नहीं देते. लगातार स्क्रीनिंग टेस्ट कराने से ही इनका पता चल पाता है।

 

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