जानिए, माथे पर तिलक लगाने के चमत्कारी फायदे और क्या है इसके नियम

हिन्दू धर्म में कुछ ऐसी परंपराएं हैं जिनका महत्व तो बहुत है, लेकिन समय के साथ-साथ वह धूमिल पड़ती जा रही है। प्राचीन काल में जब भी राजा महाराजा शुभ कार्यों के लिए जाते थे तो माथे पर तिलक लगवाकर जाते थे। कोई राजा महाराजा युद्ध के लिए भी जाते थे, तो विजय के लिए अपने ईष्ट को याद करते थे और माथे पर तिलक लगाकर जाते थे। यूं तो माथे पर तिलक लगाने के लिए अलावा हिन्दू परंपराओं में गले, हृदय, दोनों बाजू, नाभि, पीठ, दोनों बगल आदि मिलाकर शरीर के कुल 12 स्थानों पर तिलक लगाने का विधान है। वैसे शास्त्रों में विस्तार से मस्तिष्क पर तिलक लगाने के महत्व के बारे में बताया गया है। हालांकि, अब तो इस विधान को वैज्ञानिक भी मानने लगे हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि मस्तक पर तिलक लगाने से शांति और ऊर्जा मिलती है। भारत में कई तरह के तिलक प्रचलित हैं। चंदन, गोपीचंदन, सिंदूर, रोली, भस्म इत्यादि। ऐसे में अब सवाल ये उठता है कि किस दिन कौन-सा तिलक लगाकर घर से शुभ कार्यों के लिए निकले। जिससे हर कार्यों में सफलता मिले और मस्तिष्क को शांति और बल मिले?

इस क्रम में आज हम आपको ज्योतिष के अनुसार सुझाया गया तिलक और उसके पीछे की मान्यता बता रहे हैं। तिलक कई प्रकार के होते हैं। मृतिका, भस्म, चंदन, रोली, सिंदूर, गोपी आदि। सनातन धर्म में शैव, शाक्त, वैष्णव व अन्य मतों के अलग-2 तिलक होते हैं। चंदन का तिलक लगाने से पापों का नाश होता है। व्यक्ति संकटों से बचता है। उस पर लक्ष्मी की कृपा हमेशा बनी रहती है। ज्ञान तंतु संयमित व सक्रिय रहते हैं।

चंदन के प्रकार: हरि चंदन, गोपी चंदन, सफेद चंदन, लाल चंदन, गोमती और गोकुल चंदन।

दिन के अनुसार धारण करें :

1 सोमवार : सोमवार का दिन भगवान शंकर का दिन होता है तथा इस वार का स्वामी ग्रह चंद्रमा हैं। चंद्रमा मन का कारक ग्रह माना गया है। मन को काबू में रखकर मस्तिष्क को शीतल और शांत बनाए रखने के लिए आप सफेद चंदन का तिलक लगाएं। इस दिन विभूति या भस्म भी लगा सकते हैं।

2 मंगलवार : मंगलवार को हनुमानजी का दिन माना गया है। इस दिन का स्वामी ग्रह मंगल है। मंगल लाल रंग का प्रतिनिधित्व करता है। इस दिन लाल चंदन या चमेली के तेल में घुला हुआ सिंदूर का तिलक लगाने से ऊर्जा और कार्यक्षमता में विकास होता है। इससे मन की उदासी और निराशा हट जाती है और दिन शुभ बनता है।

3 बुधवार : बुधवार को जहां मां दुर्गा का दिन माना गया है वहीं यह भगवान गणेश का दिन भी है। इस दिन का ग्रह स्वामी है बुध ग्रह।
इस दिन सूखे सिंदूर (जिसमें कोई तेल न मिला हो) का तिलक लगाना चाहिए। इस तिलक से बौद्धिक क्षमता तेज होती है और दिन शुभ रहता है।

4 गुरुवार : गुरुवार को बृहस्पतिवार भी कहा जाता है। बृहस्पति ऋषि देवताओं के गुरु हैं। इस दिन के खास देवता हैं ब्रह्मा। इस दिन का स्वामी ग्रह है बृहस्पति ग्रह। गुरु को पीला या सफेद मिश्रित पीला रंग प्रिय है। इस दिन सफेद चन्दन की लकड़ी को पत्थर पर घिसकर उसमें केसर मिलाकर लेप को माथे पर लगाना चाहिए या टीका लगाना चाहिए। हल्दी या गोरोचन का तिलक भी लगा सकते हैं। इससे मन में पवित्र और सकारात्मक विचार तथा अच्छे भावों का उद्भव होगा जिससे दिन भी शुभ रहेगा और आर्थिक परेशानी का हल भी निकलेगा।

5 शुक्रवार : शुक्रवार का दिन भगवान विष्णु की पत्नी लक्ष्मीजी का रहता है। इस दिन का ग्रह स्वामी शुक्र ग्रह है। हालांकि इस ग्रह को दैत्यराज भी कहा जाता है। दैत्यों के गुरु शुक्राचार्य थे। इस दिन लाल चंदन लगाने से जहां तनाव दूर रहता है वहीं इससे भौतिक सुख सुविधाओं में भी वृद्धि होती है। इस दिन सिंदूर भी लगा सकते हैं।

6 शनिवार : शनिवार को भैरव, शनि और यमराज का दिन माना जाता है। इस दिन के ग्रह स्वामी है शनि ग्रह। शनिवार के दिन विभूत, भस्म या लाल चंदन लगाना चाहिए जिससे भैरव महाराज प्रसन्न रहते हैं और किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं होने देते। दिन शुभ रहता है।

7 रविवार : रविवार का दिन भगवान विष्णु और सूर्य का दिन रहता है। इस दिन के ग्रह स्वामी है सूर्य ग्रह जो ग्रहों के राजा हैं। इस दिन लाल चंदन या हरि चंदन लगाएं। भगवान विष्णु की कृपा रहने से जहां मान-सम्मान बढ़ता है वहीं निर्भयता आती है।

 

 

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