अमित शाह का ट्रंप कार्ड साबित हो रहे हैं योगी

कर्नाटक के तटीय इलाकों में यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने प्रचार किया जहां बीजेपी को भारी जीत मिली है. कर्नाटक में बीजेपी को सिर्फ पीएम नरेंद्र मोदी का ही सहारा नहीं था. योगी ने भी यहां पार्टी को जिताने के लिए खुलकर बैटिंग की.

योगी को जिस तटीय कर्नाटक में कमल खिलाने की जिम्मेदारी मिली थी उस इलाके में विधानसभा की कुल 21 सीटे हैं. अभी तक आ रहे आंकड़ों के मुताबिक बीजेपी इस इलाके में ज्यादातर सीट जीत रही है. कांग्रेस को महज 2-3 सीटों से ही संतोष करना पड़ रहा है. कर्नाटक का ये वो इलाका है जिस हिंदूत्व की प्रयोगशाला के तौर पर पहचान मिली हुई है और योगी ने अपने प्रचार से इस इलाके में हिंदूत्व का जो अलख जगाया उसका फायदा नतीजों में साफ दिखा.

नरेंद्र मोदी और अमित शाह के बाद कर्नाटक में बीजेपी के प्रचार के लिए योगी आदित्यनाथ की मांग सबसे ज्यादा रही. योगी ने कई इलाकों में यहां बीजेपी के लिए जबरदस्त माहौल बनाया. योगी ने जेहाद से लेकर गाय का मुद्दा उठाकर कांग्रेस के गढ़ में सेंध लगाने की कोशिश की.

आपको याद हो तो कर्नाटक के संवेदनशील इलाके सुलिया में योगी आदित्यनाथ ने जेहाद का मुद्दा उठाकर कर्नाटक की कांग्रेस सरकार को जेहादी समर्थक बता डाला था. ये कर्नाटक का वो इलाका है जहां पिछले दो-तीन सालों में 23 बीजेपी कार्यकर्ताओं की हत्या हुई. योगी आदित्यनाथ ने कर्नाटक में 8 दिन में 26 रैलियां कीं. इस तरह यूपी के सीएम ने एक दिन में तीन से ज्यादा रैलियों को संबोधित किया. बीजेपी ने योगी का सबसे ज्यादा इस्तेमाल संवेदनशील तटीय क्षेत्र में किया.

दरअसल कर्नाटक मठ-मंदिरों का राज्य है. वहीं योगी आदित्यनाथ नाथ संप्रदाय से आते हैं. इसीलिए बीजेपी ने उन पर सोच समझकर दांव लगाया. योगी ने भी पार्टी को निराश नहीं किया. योगी ने रैलियां ही नहीं की रोड शो के जरिए भी बीजेपी के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश की. यहां योगी ने कर्नाटक का रिश्ता रामायण से ऐसा जोड़ा कि उन्हें सुनने आए लोग जयश्रीराम के नारे लगाने लगे.

योगी आदित्यनाथ त्रिपुरा में बीजेपी की जीत में अहम भूमिका निभा चुके हैं. वहां उन्होंने 9 जगह रैलियां की. जिसमें 7 जगह पर बीजेपी को जोरदार जीत मिली. उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने के बाद वो गुजरात, हिमाचल प्रदेश और त्रिपुरा में भाजपा के पक्ष में प्रचार कर चुके हैं. तीनों ही जगह बीजेपी को जीत मिली है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या हर जीत के साथ योगी का कद पार्टी में बड़ा होता जा रहा है. और क्या 2019 में योगी मोदी के लिए ट्रंप कार्ड साबित होने जा रहे हैं. तो हर चुनाव के साथ योगी आदित्यनाथ की अहमियत बीजेपी में बढ़ती जा रही है और कर्नाटक के एग्जिट पोल कमल का खिलना इस बात पर मुहर लगा रहा है.

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