‘आतंकियों को मौत के घाट उतारते रहेंगे, मसूद अजहर का भतीजा होने से फर्क नहीं पड़ता’

आर्मी चीफ बिपिन रावत ने मंगलवार को कहा कि सुरक्षा बलों का फोकस सभी आतंकियों को मौत के घाट उतारना है, उनकी पहचान क्या है, इससे फर्क नहीं पड़ता। सोमवार को दक्षिणी कश्मीर के पुलवामा में आतंकियों और सैन्य बलों के बीच हुई मुठभेड़ पर जनरल रावत ने कहा, यह फर्क नहीं पड़ता कि मारा गया आतंकवादी जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर का भतीजा है। हमारा मकसद सभी आतंकियों को खत्म करना है, वह कहां से आते हैं इससे कोई लेनादेना नहीं है। पुलवामा जिले के अगलर जिले में सुरक्षा बलों ने तीन आतंकियों को ढेर कर दिया था। मारे गए इन आतंकवादियों में मसूद अजहर का भतीजा तल्हा राशिद भी था।

इस मुठभेड़ के दौरान सेना का एक जवान शहीद और एक नागरिक घायल हो गया था। पुलिस सूत्रों ने सहयोगी इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि घटनास्थल से अमेरिका निर्मित हथियार भी बरामद हुआ है। पिछले हफ्ते सोशल मीडिया पर तस्वीर वायरल हुई थी, जिसमें एक आतंकी एम4 राइफल लिए खड़ा था। एम4 राइफल मिलने की घटना पर रावत ने एएनआई को बताया कि इससे साफ पता चलता है कि आतंकियों को सीमापार से समर्थन मिल रहा है। पुलिस सूत्रों ने यह भी बताया कि जैश-ए-मोहम्मद के खिलाफ पुलिस द्वारा चलाए जा रहे एक अॉपरेशन के तहत राशिद को निशाना बनाया गया था। इस मामले पर कश्मीर के आईजीपी मुनीर खान ने कहा कि पहली बार उन्होंने किसी को पाकिस्तानी आतंकवादी माना है। वह मसूद अजहर का भतीजा है। हम उन्हें यह शव देंगे, क्योंकि इसका ताल्लुक उन्हीं से है।

गौरतलब है कि  जैश सरगना अजहर मसूद को पठानकोट एयरबेस पर हुए हमले का मास्टरमाइंड बताया जाता है। इसके अलावा 1999 में कंधार विमान अपहरण में भी मसूद का ही हाथ था। मसूद भारत की जेल में बंद था। उसे छुड़वाने के लिए आतंकियों ने इंडियन एयरलाइन्स का अपहरण कर भारत सरकार के सामने अजहर मसूद समेत तीन आतंकियों को रिहा करने की मांग की थी। सरकार विमान में मौजूद 178 यात्रियों को सकुशल आतंकियों के चंगुल से छुड़ाना चाहती थी, इसलिए सरकार को मसूद समेत अन्य आतंकियों को रिहा करना पड़ा था।

 

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