जनप्रतिनिधियों के अपराधिक मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतों का गठन हो : सुप्रीम कोर्ट

नेताओं पर आपराधिक मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त हो गया है. अदालत ने जनप्रतिनिधियों के खिलाफ मुकदमे निपटाने के लिए स्पेशल कोर्ट के गठन का आदेश दिया है. कोर्ट ने सरकार से कहा है कि स्पेशल कोर्ट बनाने के लिए फंड और संसाधनों की पूरी योजना दाखिल करे. इसके साथ ही कोर्ट ने टिप्पणी की है केंद्र एक ओर तो स्पेशल कोर्ट बनाने का बात करता है और दूसरी ओर कहता है कि यह राज्यों का मामला है. मामले की अगली सुनवाई अब 31 दिसंबर को होगी. 
वहीं केंद्र सरकार ने कहा कि वह जनप्रतिधियों के खिलाफ आपराधिक मामलों की फास्टट्रैक सुनवाई के लिए स्पेशल कोर्ट बनाने के समर्थन में है. इन मामलों की सुनवाई कम से कम वक्त में पूरी होनी चाहिए. सजायाफ्ता जनप्रतिनिधियों के आजीवन चुनाव लड़ने पर रोक पर अभी विचार जारी है. वहीं सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने याचिकाकर्ता की मांगों का समर्थन किया. 

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा 
2014 के चुनाव के दौरान 1581 उम्मीदवारों के खिलाफ चल रहे आपराधिक मामलों का क्या हुआ.
इनमें से कितने मामलों में सजा हुई, कितने लंबित हैं और इन मामलों की सुनवाई में कितना वक्त लगा.
2014 से 2017 तक जनप्रतिनिधियों के खिलाफ कितने आपराधिक मामले दर्ज हुए. उनका क्या हुआ, कितने मामलों में सजा हुई, कितने मामलों में बरी हुए और कितने मामले लंबित हैं ये सब जानकारी कोर्ट को दी जाए.

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