”मैंने कभी नहीं कहा था कि हम अर्थव्‍यवस्‍था को बढ़ावा देने के लिए पैकेज देंगे”

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि उन्होंने अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए कभी भी प्रोत्साहन पैकेज की बात नहीं की। यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार बड़े पैमाने पर वित्तीय प्रोत्साहन पैकेज पर विचार कर रही है, जेटली ने कहा कि इस बारे में बात मीडिया ने की है और आपको उनसे यह पूछना चाहिए। मंत्री ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘मैंने इस शब्द (राजकोषीय प्रोत्साहन) का उपयोग नहीं किया। मैंने कहा है कि हम स्थिति को देखते हुए उपयुक्त कदम उठाएंगे और आपकी बिरादरी ने इसका अर्थ प्रोत्साहन पैकेज लगाया। इसीलिए इसका उत्तर आपको देना चाहिए, मुझे नहीं।’’

वित्त मंत्री अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष और विश्वबैंक की सालाना बैठक में भाग लेने के लिए एक सप्ताह की यात्रा पर अमेरिका गए हुए हैं। लगातार छह आर्थिक तिमाहियों में आर्थिक वृद्धि में गिरावट को देखते हुए राजकोषीय प्रोत्साहन की अटकलें लगायी जा रही है जो, 40,000 करोड़ रुपए से अधिक हो सकता है। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में आर्थिक वृद्धि दर 5.7 प्रतिशत रही, जो तीन साल का न्यूनतम स्तर है। जेटली ने कहा कि उनकी सरकार को विरासत में बड़ा राजकोषीय घाटा मिला। केवल साढ़े तीन साल पहले यह 4.6 प्रतिशत था और भारत धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है, जो आगे भी जारी रहेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि रिजर्व बैंक एक परिपक्व संस्थान है और उसे पता है कि क्या करना है। जेटली ने कहा, ‘‘उन्हें पता है कि मुद्रास्फीति प्रबंधन और वृद्धि दोनों में संतुलन रखना है। रिजर्व बैंक की इसमें विशेषज्ञता है। वे अपना निर्णय उसके अनुसार लेते हैं।’’ जेटली ने यह भी कहा कि अमेरिका आने वाले भारतीय आईटी पेशेवर अवैध आर्थिक आव्रजक नहीं है और अमेरिका सरकार को अपनी वीजा नीति पर निर्णय लेते समय इस पर उपयुक्त रूप से विचार करना चाहिए। एच-1बी वीजा गैर-आव्रजक वीजा है, जो अमेरिकी कंपनियों को विदेशी कर्मचारियों को नियुक्ति की अनुमति देता है। भारतीय आईटी पेशेवरों में इसकी अच्छी मांग है।

 

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