उपराष्ट्रपति पद के लिए नायडू क्यों बने पीएम मोदी की पहली पसंद?

आज का दिन सियासी गलियारे के लिए बेहद अहम रहा. एक तरफ राष्ट्रपति चुनाव का मतदान संपन्न हुआ तो दूसरी तरफ एनडीए की तरफ से भी आज उपराष्ट्रपति के उम्मीदवार की घोषणा कर दी गई. एनडीए ने शहरी विकास मंत्री एम. वेंकैया नायडू को उपराष्ट्रपति पद के लिए अपना उम्मीदवार बनाया है. बीजेपी संसदीय बोर्ड के फैसले की जानकारी देते हुए अमित शाह ने कहा, ‘बीजेपी ने सर्वसम्मति से नायडू को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाने का फैसला किया है. एनडीए के सभी दलों ने नायडू के नाम पर सहमति जताई है.’

काम आएगा अनुभव

बीजेपी चाहती है कि उप राष्ट्रपति पद पर बैठने वाला शख्स ऐसा हो जो राज्यसभा के सियासी समीकरण को संभाल सके, क्योंकि वहां पर बीजेपी कमज़ोर है. नायडू के पास प्रशासनिक अनुभव भी है. राज्यसभा में सियासी आंकड़ों के खेल में बीजेपी पीछे पड़ जाती है. ऐसे में उनका राजनीतिक कौशल और उनका कद्दावर व्यक्तित्व सदन चलाने में काम आ सकता है. नायडू 4 बार राज्यसभा के सदस्य रहे हैं. उनका 25 साल से लंबा संसदीय कार्य का अनुभव है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वेंकैया की उम्मीदवारी पर ट्वीट करते हुए कहा है कि मैं वेंकैया गारू को सालों से जानता हूं, उनकी कड़ी मेहनत का हमेशा मुरीद रहा हूं, उप राष्ट्रपति पद के लिए सबसे योग्य उम्मीदवार हैं, किसान के बेटे वेंकैया नायडू की प्रशासनिक कुशलता की सभी तारीफ करते हैं.

वेंकैया नायडू इंग्लिश, हिंदी, तेलगू, तमिल समेत कई भाषाएं जानते हैं. अक्सर देखा गया है कि चाहे सरकार हो या पार्टी हो उसमें कोई भी तकनीकी विषय आता है या कोई संकट आता है तो वो लगातार अच्छा प्रदर्शन करते हैं. शायद इसीलिए मोदी सरकार में उनकी भूमिका एक संकटमोचक की तरह देखी जाती है. सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है उनकी सियासी सूझबूझ. वेंकैया ने कई बार पार्टी और सरकार को संकट से निकालने में बेहद अहम भूमिका निभाई है.

दक्षिण भारतीय
दरअसल बीजेपी की रणनीति है कि उत्तर भारत से राष्ट्रपति के बाद उपराष्ट्रपति दक्षिण भारत का हो, जिससे वहां भी कमल खिलाने का रास्ता आसान हो सके, और इसके लिए वेंकैया नायडू से बेहतर और कोई नहीं हो सकता था.  इस निर्णय के जरिए भी बीजेपी अपने लिए दक्षिण में संभावना तलाशने की कोशिश करेगी.

संसदीय कार्य और संगठन दोनों का अनुभव

वेंकैया नायडू मोदी सरकार के सबसे वरिष्ठ मंत्रियों में से एक हैं और वो दक्षिण भारत के सबसे पुराने बीजेपी नेताओं में से एक हैं. उनका 25 साल से लंबा संसदीय कार्य का अनुभव है. नायडू 4 बार राज्यसभा के सदस्य रहे हैं. वर्तमान में मंत्री भी हैं. नायडू पार्टी और नेतृत्व के भरोसेमंद सिपाही हैं. अमित शाह ने भी कहा कि कई नामों पर चर्चा हुई लेकिन वेंकैया जी सबसे अनुभवी है इसलिए उनके नाम पर फैसला हुआ.

आरएसएस बैकग्राउंड
आंध्रप्रदेश के नेल्लोर जिले के रहने वाले वेंकैया नायडू बीजेपी में शामिल होने से पहले 70 के दशक में आरएसएस और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में उल्लेखनीय योगदान दे चुके हैं. आपातकाल के दौरान वो जय प्रकाश नारायण के आंदोलन से जुड़े थे और उस समय वो जेल भी गये थे. 1978 और 1983 में नेल्लौर से विधायक चुने के बाद वो पहली बार 1998 में राज्यसभा सांसद बने. अभी वो राजस्थान से राज्यसभा सांसद है और मोदी सरकार में उनकी भूमिका एक संकटमोचक के तौर पर है.

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