चुनाव आयुक्त रावत ने आप के मामलों से खुद को अलग किया

दिल्ली के मुख्यमंत्री तथा आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक द्वारा आरोप लगाने के बाद चुनाव आयुक्त ओ.पी.रावत ने आप से संबंधित उन मामलों से खुद को अलग कर लिया है, जिनकी सुनवाई निर्वाचन आयोग कर रहा है। केजरीवाल ने हाल में एक समाचारपत्र को दिए साक्षात्कार में कहा था कि उन्होंने पाया है कि तीन में से दो निर्वाचन आयुक्त पूर्वाग्रहग्रस्त हैं, जिनमें से एक कथित तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नजदीकी हैं, जबकि दूसरा मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के करीबी हैं।

रावत भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के मध्य प्रदेश कैडर के सेवानिवृत्त अधिकारी हैं। वह दिसंबर 2013 में सेवानिवृत्त हुए थे, जिसके बाद साल 2015 में उनकी नियुक्ति निर्वाचन आयुक्त के पद पर हुई।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त नसीम जैदी से बुधवार को किए गए पत्राचार में रावत ने कथित तौर पर अपने फैसले के लिए निर्वाचन आयोग की विश्वसनीयता तथा निष्पक्षता को बरकरार रखने का हवाला दिया।

निर्वाचन आयोग आप के 21 विधायकों के खिलाफ कथित तौर पर लाभ का पद रखने से संबंधित मामले की सुनवाई कर रहा है, जिसमें सभी विधायकों को अयोग्य ठहराए जाने की संभावना है।

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