सरकार ऋण वृद्धि को बढ़ाने के प्रयास में जुटी : जेटली

नई दिल्ली:  वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मंगलवार को कहा कि सरकार ऋण वृद्धि और अर्थव्यवस्था के विस्तार के लिए विभिन्न कदम उठा रही है जिसमें सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के पुर्नपूजीकरण भी शामिल है। जेटली ने राज्यसभा में कहा, "सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) के पूंजीकरण के लिए विनियामक पूंजी मानदंडों के साथ-साथ बढ़ती अर्थव्यवस्था की जरूरतों को पूरा करने के लिए ऋण वृद्धि को बढ़ाने का प्रयास भी कर रही है।"

जेटली ने कहा कि यह मूल्यांकन किया गया है कि पीएसबी में 1.80 लाख करोड़ रुपये के निवेश की आवश्यकता है।

जेटली ने कहा, "इंद्रधनुष स्कीम के तहत, सरकार ने बजटीय संसाधनों से 70,000 करोड़ रुपये का निवेश करने का निर्णय लिया है। केंद सरकार की नीति से दूसरी किश्त की पूंजी 1.10 लाख करोड़ रुपये आएगी, जिसमें सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की हिस्सेदारी को कम किया जा सकता है, लेकिन इसे निश्चित रूप से न्यूनतम 52 प्रतिशत के स्तर पर रखा जाएगा।"

उन्होंने कहा कि 'केवल इसलिए कि उद्योग के कुछ लोग बैंकों का कर्ज नहीं चुकाते हैं,' इसका मतलब यह नहीं है कि 'करदाताओं को उन बैंकों को चालू रखने का बोझ उठाना चाहिए।' उन्होंने कहा कि ऐसा तब होगा जब सरकार उन सरकारी बैंकों के फंसे हुए कर्जो की पूरी पूंजी की भरपाई करेगी।

जेटली ने कहा, "एक आदर्श स्थिति में हम उन (पीएसबी) शेयरों का सबसे अच्छा मूल्यांकन हासिल करने की स्थिति में हैं (सरकार अपनी इक्विटी को कम कर देगी), और उस पैसे का इस्तेमाल पैसा लगाने के लिए किया जा सकता है ताकि पूरा बोझ करदाताओं पर ना आए।"

वित्त मंत्री ने कहा कि इंद्रधनुष योजना- सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के कामकाज में सुधार करने के लिए- पीएसबी के पुनर्पूंजीकरण की दिशा में अंतिम कदम नहीं है।

उन्होंने कहा कि फंसे हुए कजरें के समाधान के लिए, आरबीआई ने कई तरह के उपाय किए हैं, जिसमें कॉरपोरेट कर्ज को रिस्ट्रकचर करना यानि कर्ज में छूट देना (सीडीआर), स्ट्रैटेजिक डेट रिस्ट्रक्च रिंग स्कीम (एसडीआर) यानि रणनीतिक रूप से कर्ज में छूट देना और स्ट्रेस्ड एसेट्स (एस 4 ए) की स्थिर ऋण के लिए योजनाएं शुरू की हैं।

  • Agency: IANS