'भारत और पाकिस्तान को सिंधु जल संधि का सम्मान करने की जरूरत'

इस्लामाबाद:  पाकिस्तान के जल एवं बिजली मंत्री ख्वाजा आसिफ ने सोमवार को कहा कि भारत और पाकिस्तान को सिंधु जल संधि का सम्मान करना चाहिए, क्योंकि यह संधि दोनों ही देशों के हित में है। ख्वाजा आसिफ ने इस्लामाबाद में सोमवार को शुरू हुए भारत-पाक सिंधु जल आयोग के 113वें सम्मेलन से पहले संवाददाता सम्मेलन में कहा, "2015 से निलंबित चल रही वार्ता दोनों सरकारों की कोशिशों से दोबारा शुरू हुई है। यह संधि दोनों ही देशों के हित में है।"

समाचार-पत्र 'डान' के मुताबिक, भारतीय सिंधु चल आयुक्त पी. पी. सक्सेना के नेतृत्व में 10 सदस्यीय भारतीय प्रतिनिधिमंडल रविवार को वार्ता में हिस्सा लेने पाकिस्तान पहुंचा। इससे पहले मई, 2015 में दोनों देशों के बीच यह वार्ता हुई थी।

पाकिस्तान के सिंधु जल आयुक्त मिर्जा आसिफ बेग वार्ता में पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे थे।

इस दो दिवसीय वार्ता के दौरान चिनाब नदी पर तीन जल परियोजनाएं बातचीत के केंद्र में होंगी, जिसके डिजाइन को लेकर पाकिस्तान ने विरोध दर्ज कराया है।

आसिफ ने यहां पत्रकारों से कहा कि वार्ता विभिन्न विद्युत उत्पादन क्षमता वाली तीन जल विद्युत परियोजनाओं पर केंद्रित होंगी। इन जल विद्युत परियोजनाओं में पाकुल दल (1,000 मेगावाट), मियार (120 मेगावाट) और लोअर कालनाई (48 मेगावाट ) शामिल हैं।

उन्होंने कहा, "इस सिंधु जल संधि का सम्मान करना और इसके जरिए एक समाधान हासिल करना दोनों देशों के हित में है।"

ख्वाजा आसिफ ने विवादित किशनगंगा और रातले जल विद्युत परियोजनाओं का भी जिक्र किया, जिसे लेकर पाकिस्तान विश्व बैंक से मध्यस्थता पंचाट गठित करने की गुहार लगा चुका है।

आसिफ ने कहा कि किशनगंगा परियोजना को लेकर विलंब किया जा रहा है और "जब हम (पाकिस्तान) इस मुद्दे को लेकर मध्यस्थता अदालत गए तो हमारा पक्ष मजबूत नहीं था। अगर हम और पहले अदालत गए होते तो निश्चित तौर पर हमारा पक्ष मजबूत हो सकता था।"

आसिफ ने साथ ही यह भी कहा कि हालांकि रातले परियोजना पर हमारी स्थिति मजबूत है।

उन्होंने कहा, "हम परियोजनाओं की डिजाइन बदलवाने की दिशा में काम कर रहे हैं, जो संधि के अनुरूप और पाकिस्तान में हित में हो।"

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