मणिपुर : 5 महीने बाद हटेगी नगाओं की आर्थिक नाकेबंदी

 

इम्फाल:  यूनाइटेड नगा काउंसिल (यूएनसी) द्वारा की गई मणिपुर की आर्थिक नाकेबंदी रविवार की मध्य रात्रि से हटा ली जाएगी। यूएनसी के एक अधिकारी ने यह घोषणा की। यूएनसी के महासचिव एस. मिलन ने कहा कि रविवार को यूएनसी के दो संबद्ध संगठनों- ऑल नगा स्टूडेंट्स एसोसिएशन मणिपुर (एएनएसएएम) और नगा वूमन यूनियन (एनडब्ल्यूयू)- और केंद्र तथा मणिपुर की सरकारों के बीच हुई त्रिकोणीय वार्ता में हुए समझौते के बाद यह फैसला लिया गया।

यह बैठक सेनापति जिला मुख्यालय पर हुई, जहां यूएनसी का मुख्य कार्यालय भी स्थित है। नगा नेताओं ने सेनापति में ही बैठक करने की शर्त रखी थी, जिस पर पिछली सरकार ने सहमति नहीं दी थी।

नगा संगठन ने सात नए जिले गठित करने की मांग को लेकर बीते वर्ष एक नवंबर को यह आर्थिक नाकेबंदी शुरू की थी। नगा नेताओं का कहना है कि 'नगाओं की भूमि' को इस तरह उनसे नहीं छीना जा सकता।

अब चूंकि इस मुद्दे पर समझौता हो चुका है तो न्यायिक हिरासत में चल रहे यूएनसी के अध्यक्ष गाइडॉन कामेई और प्रचार सचिव एस. स्टीफेन के जल्द रिहा होने की उम्मीद है। इसके अलावा समझौते के तहत इस आर्थिक नाकेबंदी को लेकर शुरू किए गए सभी मामले बंद किए जाएंगे।

नाकेबंदी के दौरान कुछ अज्ञात लोगों ने राजमार्ग पर कई ट्रकों को फूंक दिया, वाहन चालकों के साथ मारपीट की और सुरक्षा कर्मियों पर भी हमला किया।

मिलन ने सरकार के हवाले से कहा, "राजनीतिक स्तर पर वार्ता जारी रहेगी।"

इस बैठक में मणिपुर सरकार की ओर से अतिरिक्त मुख्य सचिव सुरेश बाबू और आयुक्त के. राधाकुमार, केंद्र सरकार की ओर से गृह मंत्रालय में पूर्वोत्तर का प्रभार देख रहे सचिव एस. गर्ग और यूएनसी की ओर से पूर्व अध्यक्ष पॉल लीयो और एएनएसएएम तथा एनडब्ल्यूयू के नेता शामिल थे।

इस आर्थिक नाकेबंदी के चलते मणिपुर में ईंधन सहित सभी उपयोगी वस्तुओं की भारी किल्लत चल रही है। एक सप्ताह में दो बार अधिक से अधिक 300 ट्रकों और तेल टैंकरों को उपयोगी सामग्री के साथ प्रवेश करने दिया जाता था, जो मांग के अनुपात में नगण्य साबित हो रहा था।

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