भाजपा ने मानवाधिकारों का उल्लंघन किया है : चिदंबरम

 

नई दिल्ली:  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने सरकार पर व्यक्तिगत व मानवाधिकार के उल्लंघन का आरोप लगाया। उन्होंने मोदी सरकार पर स्वतंत्र विचारकों को डराने और इतिहास में पौराणिक कथाओं के घालमेल का भी आरोप लगाया।

चिदंबरम ने गुरुवार को आईएएनएस को दिए गए साक्षात्कार में कहा, "इस सरकार ने खुले तौर पर व्यक्तिगत और मानवाधिकारों का उल्लंघन किया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कुछ समर्थक हमें बताते हैं कि क्या पहनना, क्या खाना, किससे प्यार करना और किससे शादी करनी चाहिए। इसके बावजूद अभी तक प्रधानमंत्री ने इन अतिवादी तत्वों पर एक शब्द भी नहीं बोला है।"

उन्होंने कहा, "यहां तक कि मौजूदा उत्तर प्रदेश चुनावों में कट्टरवादी तत्वों को भाजपा का स्टार प्रचारक बनाया गया है। यह प्रवृत्ति एक खुले लोकतंत्र और संपन्न समाज के लिए अच्छी नहीं है।"

बीते सप्ताह चिदंबरम की पुस्तक 'फियरलेस इन अपोजिशन : पॉवर एंड अकाउंटबिलिटी' का विमोचन बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार, माकपा नेता सीताराम येचुरी, कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने संयुक्त रूप से किया था।

अपनी किताब में चिदंबरम ने सरकार पर अतिवादी दक्षिणपंथी तत्वों की इस प्रवृत्ति को बढ़ावा देने का आरोप लगाया कि जो कोई इनकी नीति से सहमत न हो, उसे सीधे राष्ट्रविरोधी करार दे दो।

उन्होंने कहा, "इस सरकार के मुताबिक, कोई भी व्यक्ति जो इनकी नीतियों पर सवाल उठाता है, वह राष्ट्र विरोधी है। कोई भी अगर पूछता है कि रोहित वेमुला को आत्महत्या के लिए क्यों बाध्य किया गया, दादरी में अखलाक को पीट पीटकर क्यों मार डाला गया, कन्हैया कुमार को जेल में क्यों डाला गया, तो वह राष्ट्र विरोधी कह दिया जाता है। विपक्ष में होने के नाते सवाल पूछना हमारा कर्तव्य है।"

चिदंबरम (72) ने इतिहास को फिर से लिखे जाने के लगातार प्रयासों पर अपनी निराशा जाहिर की। उन्होंने कहा कि सरकार भारतीय सांस्कृतिक विरासत को नई व्याख्या देना चाहती है।

उन्होंने भाजपा को 'गैर ऐतिहासिक पार्टी' करार देते हुए कहा कि इसे इतिहास की सिरे से समझ ही नहीं है।

उन्होंने कहा कि इतिहास क्या घटित हुआ, इसके रिकार्ड का नाम है। इसे मिथकीय कहानियों से अलग रखा जाना चाहिए। दुर्भाग्य से भाजपा इतिहास और मिथक को एक ही में मिला देती है। ऐतिहासिक घटनाओं की कोई एक ही व्याख्या नहीं हो सकती। भाजपा एक ही व्याख्या चाहती है जोकि पूरी तरह से गैर बौद्धिक है।

साल 2019 लोकसभा चुनावों से पहले विपक्ष की एकजुटता पर कांग्रेस नेता ने कहा कि वह कई विपक्षी पार्टियों के बढ़ते रिश्तों पर नजर बनाए हुए हैं। इंतजार करना होगा और देखना होगा कि राज्यों के स्तर पर विपक्षी दलों के बीच बन रही एकता आगे चलकर कैसा रूप लेती है।

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