त्यागी के खिलाफ सबूत जुटाने में नाकाम रही सीबीआई : अदालत

नई दिल्ली:  राष्ट्रीय राजधानी की एक अदालत ने सोमवार को इस बात पर आश्चर्य जताया कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) तीन साल नौ महीने की जांच के बाद भी अगस्तावेस्टलैंड मामले में पूर्व वायुसेना प्रमुख एस.पी.त्यागी को दी गई रिश्वत के बारे में पता नहीं लगा पाया। विशेष न्यायाधीश अरविंद कुमार ने त्यागी की जमानत याचिका को मंजूरी देते हुए कहा, "बहस के दौरान, सीबीआई यह बताने में नाकाम रही कि आरोपी (त्यागी) को कितनी रकम और कब दी गई।"

दिल्ली की एक विशेष अदालत ने अगस्तावेस्टलैंड हेलीकॉप्टर सौदे में रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार पूर्व वायुसेना (आईएएफ) प्रमुख एस.पी.त्यागी को सोमवार को जमानत दे दी।

त्यागी देश में किसी भी सशस्त्र बल के पहले प्रमुख हैं, जिन्हें गिरफ्तार किया गया है। त्यागी और दो अन्य को ब्रिटेन की कंपनी अगस्तावेस्टलैंड से 12 एडब्ल्यू-101 वीवीआईपी हेलीकॉप्टर की खरीद में कथित अनियमितता के लिए गिरफ्तार किया गया।

अदालत ने कहा, "सीबीआई ने संपत्ति से संबंधित दस्तावेजों को साल 2013 में जब्त किया था और अब तीन साल नौ महीने का वक्त गुजर चुका है, लेकिन इस संबंध में जांच नहीं कर सकी। सीबीआई ने आरोपी की गिरफ्तारी को लेकर एक नोट में कहा था कि आरोपी की संपत्तियों को गैरकानूनी संपत्ति में शामिल किया जाएगा।"

आरोपी के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र, धोखाधड़ी व प्रीवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट के तहत 12 मार्च, 2013 को प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी।

सीबीआई ने आरोप लगाया है कि त्यागी तथा अन्य आरोपियों ने 55.6262 करोड़ डॉलर के वीवीआईपी हेलीकॉप्टर का ठेका दिलाने के लिए अगस्ता वेस्टलैंड कंपनी से रिश्वत ली। ये हेलीकॉप्टर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री तथा अन्य वीवीआपी लोगों को लाने ले जाने के लिए खरीदे जाने वाले थे।

जांच एजेंसी के मुताबिक, आरोपी ने कथित तौर पर हेलीकॉप्टर के उड़ने की न्यूनतम ऊंचाई सीमा को 6,000 मीटर से घटाकर 4,500 मीटर करने के लिए एक षड्यंत्र किया, ताकि अगस्तावेस्टलैंड ठेके के योग्य हो सके।

सीबीआई ने कहा है कि आरोपियों ने उस कंपनी का पक्ष लिया और परामर्श सेवाओं के नाम पर विभिन्न कंपनियों के माध्यम से अवैध रकम ली।

जांच एजेंसी ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि संजीव त्यागी सहित त्यागी के तीन रिश्तेदारों ने ट्यूनिशिया की गोर्डियन सर्विसेज सार्ल के साथ 2004 में एक परामर्श समझौता किया।

सीबीआई ने दावा किया कि त्यागी के रिश्तेदारों ने परामर्श शुल्क के रूप में गोर्डियन सर्विसेज से मई 2004 के बाद 1,26,000 यूरो तथा फरवरी 2005 के बाद 200,000 यूरो की रकम ली।

एजेंसी ने यह भी कहा कि त्यागी ने गोर्डियन सर्विसेज से जुड़े गुइडो राल्फ हश्के तथा कार्लो वेलेंटिनो फर्डिनांडो गेरोसा से नकद में भी रकम ली।

त्यागी ने हालांकि इन आरोपों से इनकार किया है। इस मामले में दो अन्य आरोपियों ने भी जमानत की अपील की है।

अदालत ने अन्य दोनों आरोपियों संजीव त्यागी तथा खेतान की जमानत याचिका पर फैसला चार जनवरी, 2017 तक के लिए सुरक्षित रख लिया है।

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