बाहुबली के दूसरे पार्ट में टीम ने 120 दिन तक लगातार काम करके शूट किया युद्ध सीन

बाहुबली के दूसरे पार्ट की रिलीज से पहले फिल्म का पहला पार्ट रिलीज कर दिया गया है ताकि जिन लोगों ने फिल्म का पहला पार्ट नहीं देखा है वह एक बार इसे देख लें और दूसरे पार्ट को देखने के लिए कहानी को अपने दिमाग में साफ कर लें। फिल्म का दूसरा पार्ट 28 अप्रैल को रिलीज किया जाएगा, यानि अब बहुत ज्यादा वक्त नहीं बचा है। फिल्म का ट्रेलर काफी पहले ही रिलीज किया जा चुका है और इसे 24 घंटे के अंदर सबसे ज्यादा देखे जाने वाले ट्रेलर का भी खिताब मिल गया। इस सब के अलावा एक बात जो गौर करने वाली थी वह यह कि फिल्म की शूटिंग के लिए कड़ी मेहनत की गई और खूब पसीना बहाया गया। तकरीबन 4 साल तक चली शूटिंग में क्रू ने अपनी जान झोंक दी और अपने ज्यादातर निजी कामों को भारत की इस दूसरी सबसे महंगी फिल्म के लिए खूब सैक्रिफाइज किए।

निर्देशक एस.एस. राजामौली के साथ कई फिल्में कर चुके सेंथिल कुमार ने एनडीटीवी को बताया- बाहुबली राजामौली के साथ मेरी 8वीं फिल्म है। वह एक बहुत ही स्वप्नदर्शी निर्देशक हैं। उनका दिमाग लाखों करोड़ों शानदार खयालों से भरा रहता है। हर चीज वह पूरी बारीकी से पहले ही प्लान कर लेते हैं। बाहुबली के दूसरे पार्ट के लिए शूटिंग के लिए की गई अपनी मेहनत के बारे में सेंथिल ने बताया कि पिछले तकरीबन 4 साल से उनकी कोई खास सोशल लाइफ रह नहीं गई है। इस स्तर की फिल्म को बहुत ही विस्तृत प्री-प्रोडक्शन की जरूरत होती है, जिसका मैं हिस्सा था। इसके बाद मैंने असल शूट शुरू किया। यह हैदराबाद में ही शूट किया गया लेकिन मेरे घर से दूर रामोजी फिल्म सिटी अतः मुझे हर सुबह 4.30 बजे जगना पड़ता था, ताकि मैं सुबह 6.30 बजे तक स्टूडियो पहुंच सकूं और शूट को 7 बजे तक शूट शुरू किया जा सके। हम 6 बजे तक पैक अप करने के लिए तैयार होते थे लेकिन आम तौर पर मुझे शाम 7 बजे तक रुक कर अगले दिन की शूटिंग की तैयारी करनी होती थी।

उन्होंने बताया कि ट्रैफिक से जूंझते हुए वह तकरीबन 9.30 बजे तक अपने घर पहुंच पाते थे और यही उनका 4 साल तक चला डेली रूटीन था। बाकी फिल्मों में हम 15 दिनों तक शूट करके कुछ दिन का ब्रेक ले लेते थे लेकिन बाहुबली में बात पूरी तरह अलग थी। उदाहरण के लिए युद्ध के सीन के लिए हमने 120 दिनों तक लगातार शूटिंग की, पूरी शूटिंग के बीच हमने शायद सिर्फ 2 या 3 दिन का ही ब्रेक लिया होगा। जंग के सीन्स के लिए हमें 6 बजे तक शूट पूरा करके पैकअप करना होता था क्योंकि उसके बाद रोशनी धीमी पड़ जाती थी। इंडोर सीन्स हमने फिल्म सिटी के फ्लोर्स पर शूट किए। शूटिंग को देर रात तक सिर्फ तभी बढ़ाया जाता था जब आर्टिफिशियल लाइट वाले सीन शूट किए जाने होते थे। हमारी प्राथमिकता होती थी किसी भी तरह सीन्स का शूट पूरा करना।

  • Agency: IANS