18 साल लंबा करियर, सिर्फ इस एक कड़वी याद को आज तक भुला नहीं पाए नेहरा

भारतीय क्रिकेटर आशीष नेहरा क्रिकेट से सन्यास ले चुके हैं। 2 नवंबर को आशीष नेहरा ने अपने होम ग्राउंड दिल्ली स्थित फिरोजशाह कोटला में 18 साल पुराने करियर का आखिरी मैच खेला था। आशीष नेहरा के सम्मान में स्टेडियम को उनके नाम पर छपे बैनरों से रंग दिया गया था। वहीं नेहरा को सम्मान देने के लिए टीम के कप्तान विराट कोहली ने पहला और आखिरी ओवर भी उन्हीं से डलवाया था। राजधानी का यह स्टेडियम खचाखच भरा हुआ था और दर्शक हाथ में नेहरा को शुभकामनाएं देने वाले पोस्टर लेकर उन्हें चीयर कर रहे थे। आशीष नेहरा के आखिरी मैच को देखने के लिए उनका पूरा परिवार स्टेडियम में पहुंचा था।

बता दें कि आशीष नेहरा को साल 2003 में खेले गए विश्वकप के लिए जाना जाता है, जिसमें नेहरा ने इंग्लैंड के खिलाफ 23 रन देकर 6 विकेट लिए थे। उस समय नेहरा अपने करियर के उतार-चढ़ाव को देख रहे थे और साथ ही चोटों से जूझ रहे थे। अपने इस करियर के दौरान एक घटना का अफसोस नेहरा को आज भी है जिसे वे कभी भूल नहीं सकते। पीटीआई से बातचीत के दौरान नेहरा ने कहा कि “मेरा सफर बहुत अच्छा रहा है सिवाए एक अफसोस के। अगर मैं पिछले 20 सालों में से कुछ बदल सकता तो मैं 2003 में जोहनसबर्ग में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेले गए विश्वकप के फाइनल मैच को बदलता, जिसमें भारत को हार मिली थी लेकिन हम कुछ नहीं कर सकते हैं यह सब भाग्य पर निर्भर करता है”।

इसके बाद नेहरा ने कहा कि “मेरे करियर के ये साल बहुत ही बेहतरीन गुजरे हैं। मैं कोई भावुक व्यक्ति नहीं हूं। आने वाले 20 सालों में आगे बढ़ने की उम्मीद करता हूं”। नेहरा ने कहा कि “मैं अपने क्रिकेट से सन्यास लेने के फैसले से काफी संतुष्ट और खुश हूं क्योंकि भारतीय टीम के पास भुवनेश्वर कुमार और जसप्रीत बुमराह जैसे बेहतरीन खिलाड़ी हैं”। नेहरा ने कहा “जब मैं भारतीय टीम का हिस्सा बना तब मेरे पास अपनी योजनाएं थीं। मुझे महसूस होता है कि भुवनेश्वर कुमार अब तैयार हो चुके हैं”।

 

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