'छक्का मारना मुझे बचपन से पसंद है', जानें अपने इंटरव्यू में हार्दिक पंड्या ने और क्या कहा

नागपुर में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेले गए सीरीज के आखिरी एकदिवसीय मैच को सात विकेट से जीतकर भारत सीरीज 4-1 से जीतने के साथ-साथ आईसीसी रैंकिंग में पहले स्थान पर पहुंच गया है. टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए ऑस्ट्रेलिया ने 50 ओवरों में 9 विकेट पर 242 रन बनाए थे. ऑस्ट्रेलिया की तरफ से डेविड वॉर्नर ने सबसे ज्यादा 53 रन बनाए. भारत की तरफ से अक्षर पटेल ने शानदार गेंदबाजी करते हुए 10 ओवर में सिर्फ 31 रन देकर तीन विकेट झटके. 243 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए टीम इंडिया के सलामी बल्लेबाज रोहित शर्मा और अजिंक्य रहाणे ने शानदार शुरुआत दिए. दोनों के बीच पहले विकेट के लिए 124 रन की साझेदारी हुई. टीम इंडिया की तरफ से रोहित शर्मा ने सबसे ज्यादा 125 रन बनाए जिसमें पांच छक्के और 11 चौके शामिल थे. रहाणे ने 61 रन की पारी खेली. अपनी शानदार पारी के लिए रोहित शर्मा मैन ऑफ़ द मैच बने जबकि सीरीज में 224 रन बनाने और छह विकेट लेने वाले हार्दिक पंड्या मैन ऑफ़ द सीरीज बने.

पंड्या ने कहा छक्का मारना उन्हें बचपन से पसंद है
मैच के बाद वीरेंद्र सहवाग, ज़हीर खान और जतिन सप्रू से बात करते हुए हार्दिक पंड्या ने कहा कि छक्के मारना उनको बहुत पसंद है. जब से उन्‍होंने क्रिकेट खेलना शुरू किया है तब से वो छक्का मारने की कोशिश जरूर करते हैं. जतिन सप्रू ने जब पंड्या से कहा कि छक्का मारना एक उनके लिए प्रतिष्ठा जैसा बन गया है. जब वो मैदान में आते हैं तो दर्शक छक्का मारने की डिमांड करते हैं और ऐसे में वो कैसे अपने आप को संभालते हैं? इसका जवाब देते हुए पंड्या ने कहा कि दर्शकों की क्या मांग है इसका उन पर कोई फर्क नहीं पड़ता. वो सिर्फ यही देखते हैं कि गेंद उनके रडार में है या नहीं. अगर गेंद रडार में होती है तो वो उसे बाउंड्री के बहार मारने की कोशिश करते हैं. पंड्या ने कहा कि छक्का मारना उन्हें बचपन से पसंद है. पंड्या ने कहा कि जब वो शुरुआत में छक्के मारने कोशिश करते थे तब कई बार मिड ऑन पर आउट हो जाते थे जिसकी वजह से उन्हें टीम से भी बाहर बैठना पड़ा था. लेकिन जब ताकत आई तब गेंद बाउंड्री के बाहर जाने लगी और ज्यादा से ज्यादा छक्के मारने में वो सफल हुए.

भारी बल्ले का इस्तेमाल करते हैं पंड्या
वीरेंद्र सहवाग ने जब पंड्या से पूछा कि क्‍या वो किसी खास बल्ले का इस्तेमाल करते हैं तो पंड्या ने जवाब दिया कि वो थोड़ा भारी बल्ले का इस्तेमाल करते हैं. पंड्या ने कहा कि हल्‍के बल्ले से गेंद तब छक्के के लिए जाती है जब गेंद बल्ले के बीच में आती है लेकिन भारी बल्ले से अगर इधर उधर भी लग जाए तब भी कई बार छक्का हो जाता है. इसीलिए वो भारी बल्ले का इस्तेमाल करते हैं. पंड्या ने यह भी कहा कि वो हमेशा सीधे खेलते हुए छक्का मारने की कोशिश करते हैं क्योंकि सामने ग्राउंड छोटा होता है. मिड विकेट बाउंड्री ज्यादा लंबी होने के वजह से छक्का मारना ज्यादा रिस्की है.

छक्का मारने के लिए ग्राउंड साइज नहीं देखते हैं पंड्या
जतिन सप्रू ने जब हार्दिक से सवाल किया कि जब वो तीसरे मैच में चार नंबर पर बल्लेबाजी करने गए थे तब उनसे कप्तान और कोच ने क्या कहा था और उनके ऊपर कितना दबाव था? पंड्या ने जवाब दिया, “यह मेरे लिए एक मौक़ा था, क्योंकि मुझे पता था कि चार नंबर पर बल्लेबाजी करना एक मौक़ा है और यह हमेशा नहीं मिलेगा.” पंड्या ने कहा कि जब वो छक्का लगाने जाते हैं वो ग्राउंड साइज नहीं देखते हैं. पंड्या ने कहा कि जब भी कोई बल्लेबाज छक्का मारता है वो नहीं देखता है कि फील्डर कहां पर है, वो हमेशा कोशिश करता है कि गेंद फील्डर के ऊपर से जाए. ज़हीर खान ने जब पंड्या से पूछा कि अपनी गेंदबाजी को लेकर वो किस तरह की तैयारी करते हैं तो पंड्या ने जवाब दिया कि लेंथ के ऊपर काफी ध्यान दे रहे हैं. पहले वो ज्यादा शॉर्ट पिच गेंद डालते थे जिसकी वजह से ज्यादा रन देते थे.

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