गाड़ी का इंश्योरेंस नहीं कराया तो हो जाएं अलर्ट, सरकार ने निकाला यह नया तरीका

 

देश में सभी गाड़ियों का इंश्योरेंश होना जरूरी है। अगर गाड़ी का फुल इंश्योरेंश नहीं करा सकते हैं तो थर्ड पार्टी इंश्योरेंश कराना जरूरी है। अगर कोई गाड़ी का इंश्योरेंश कराए बिना उसे चलाता है तो यह कानूनी अपराध है। देश में बिना इश्योरेंश के सड़कों पर दौड़ने वाली गाड़ियों पर लगाम लगाने के लिए सरकार नई योजना बना रही है। ट्रांसपोर्ट मिनिस्ट्री ने इंश्योरेंश कंपनियों से कहा है कि वह उन गाड़ियों की डिटेल्स दें जिनका बीमा है। यह बिना बीमा के दौड़ने वाली गाड़ियों को पकड़वाने में मदद करेगा। मिनिस्ट्री पूरे डेटा को एक ईप्लेटफोर्म पर डालेगी। इस डेटा को राज्यों के ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट और ट्रेफिक पुलिस एक्सेस कर पाएंगे। इससे उन व्हीकल्स की पहचान की जाएगी जो बिना बीमा के रोड पर चल रहे हैं। अभी अगर किसी गाड़ी का इंश्योरेंश है या खत्म हो गया है इसकी जांच के लिए गाड़ी रुकवाकर उसके इंश्योरेंश के पेपर देखने पड़ते हैं।

इंश्योरेंश इंफोर्मेशन ब्यूरो (IIB) के मुताबिक देश में करीब 21 करोड़ वाहन हैं। इनमें से केवल 6.5 करोड़ व्हीकल्स का ही बीमा है। बीमा नहीं होने वाले वाहनों में ज्यादातर वो हैं जो अब रोड पर नहीं आते। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक अधिकारियों का अनुमान है कि रोड पर चलने वाले 50-55 फीसदी वाहनों के पास बीमा है। वहीं लगभग सभी कॉमर्शियल वाहनों के पास बीमा है और वह हर साल रिन्यूअल भी कराते हैं। पैसेजर कार की बात करें तो करीब 70-80 फीसद कारों का बीमा है।  टू व्हीलर वाहनों का बीमा सबसे कम है। देश में लगभग 40-50 फीसदी टू व्हीलर वाहनों के पास ही बीमा है। देश में कुल वाहनों की संख्या में करीब 70 फीसदी हिस्सा टू व्हीलर का ही है।

 

बिना थर्ड पार्टी इंश्योरेंश के गाड़ी चलाना अपराध है। इसके लिए 1,000 रुपए तक का जुर्माना लग सकता है। इसके अलावा जेल की सजा भी हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट के एक पैनल ने इंश्योरेंश रेग्युलेटरी एंड डिवेलपमेंट अथॉरिटी (इरडा) से कहा कि वहा कार और टू व्हीलर के रजिस्ट्रेशन के समय ही 3 या 5 साल का इंश्योरेंश दे। इस पर इरडा ने कहा कि हर साल प्रीमियम को देखते हुए ऐसा कर पाना मुमकिन नहीं है।

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