ब्रिक्स की सदस्यता के प्रति बचनबद्ध : दक्षिण अफ्रीका

दक्षिण अफ्रीका के एक वरिष्ठ अधिकारी ने गुरुवार को कहा कि उनका देश उभरती अर्थव्यवस्थाओं का नेतृत्व करने वाले ब्रिक्स की सदस्यता के प्रति बचनबद्ध है और उम्मीद करता है कि एक सदस्य के रूप में वह देश की विभिन्न चुनौतियों का समाधान करेगा। साउथ अफ्रीकन डिपार्टमेंट ऑफ इंटरनेशनल रिलेशंस एंड कोऑपरेशन के मुख्य निदेशक डेव मालकॉमसन ने गुरुवार को यहां एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि ब्रिक्स द्वारा हासिल की गई उपलब्धि से देश संतुष्ट है और देश की तीन चुनौतियों -गरीबी, बेरोजगारी तथा असमानता- का समाधान करने के लिए वह इसका अनवरत इस्तेमाल करना चाहता है।

समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, मालकॉमसन ने कहा कि औद्योगिकीकरण की प्रक्रिया में ब्रिक्स न सिर्फ दक्षिण अफ्रीका की सहायता करेगा, बल्कि बुनियादी ढांचा, निवेश को बढ़ावा तथा विनिर्माण क्षेत्र को आधुनिक बनाने में सहयोग प्रदान कर संपूर्ण अफ्रीकी महादेश की मदद करेगा।

उन्होंने कहा, "हम ब्रिक्स का इस्तेमाल दक्षिण दक्षिण सहयोग, वैश्विक संरचना को बदलने, वैश्विक चुनौतियों का समाधान करने तथा दुनिया में शांति लाने के लिए करना चाहते हैं।"

यह उल्लेख करते हुए कि ब्रिक्स के सदस्यों -ब्राजील, रूस, भारत, चीन तथा दक्षिण अफ्रीका- ने महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों जैसे जलवायु परिवर्तन पर बहुपक्षीय वैश्विक निकाय के प्रति समन्वय तथा सहयोग दर्शाया है, मालकॉमसन ने कहा कि ब्रिक्स वैश्विक मामलों के लिए हमेशा प्रासंगिक रहेगा।

दक्षिण अफ्रीकी विशेषज्ञ ने गुरुवार को यह भी कहा कि विभिन्न स्थानीय तथा वैश्विक चुनौतियों से निपटने की दिशा में ब्रिक्स प्रासंगिक है।

साल 2017 के ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी चीन करेगा, क्योंकि वर्तमान में वही इसका अध्यक्ष है। इस दौरान वैश्विक आर्थिक विकास, सहयोग को बढ़ावा देने तथा विकास पर चर्चा होगी।

साउथ अफ्रीकन ब्रिक्स थिंक टैंक के शोधकर्ता अशरफ पटेल ने कहा कि नवीन विकास बैंक के कई संभावित लाभार्थी हो सकते हैं। ब्रिक्स देशों ने बहुपक्षीय विकास बैंक का गठन किया है।