अमेजन, स्‍नैपडील के चलते फ्लिपकार्ट को हो रहा नुकसान

 

ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट भारत में प्रतिद्वंदियों से साथ मुकाबला करने के लिए अमेरिकी कंपनी ईबे और चीन की टेनसेंट से 1.5 अरब डॉलर की फंडिंग के लिए बातचीत कर रही है। खबर है कि फ्लिपकार्ट भारतीय यूनिट के लिए ईबे के साथ विलय कर सकती है। ये दोनों दुनिया की बड़ी कंपनियों में शामिल हैं। इस फंडिंग राउंड में दोनों कंपनियों की तरफ से फ्लिपकार्ट में बड़ा निवेश हो सकता है। माना जा रहा है कि अगर यह डील हो जाती है तो इससे फ्लिपकार्ट में निवेश की संभावना बढ़ जाएगी। ये दोनों फ्लिपकार्ट की मेन राइवल जेफ बेजॉस की ऐमजॉन और जैक मा की अलीबाबा से मुकाबला करती हैं।

बता दें कि फ्लिपकार्ट भारतीय ऑनलाइन रिटेल मार्केट में प्रथम स्थान हासिल करना चाहती है। दुनिया में ई-कॉमर्स की रफ्तार भारत में सबसे तेज है। मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो कंपनी एक तीसरे निवेशक से और फंड जुटाने की कोशिश कर रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, ईबे के साथ बातचीत अंतिम चरण में है। संभावना जाताई जा रही है कि भारतीय बाजार में फ्लिपकार्ट ईबे की यूनिट को खरीद सकती है या फिर दोनों में विलय हो सकता है। हालांकि, कंपनी ने औपचारिक ऐलान नहीं किया है।

भारतीय ऑनलाइन रिटेल इंडस्ट्री के 15-16 अरब डॉलर का होने का अनुमान है। यहां चाइनीज और अमेरिकी कंपनियां फ्लिपकार्ट से आगे निकलने की कोशिश में हैं, जिसमें टाइगर ग्लोबल मैनेजमेंट प्राइमरी इन्वेस्टर है। कंपनी ने पिछली बार 2015 में फंड जुटाया था, तब उसकी वैल्यू 15.2 अरब डॉलर लगाई गई थी। हालिया डील में बेंगलुरु बेस्ड फ्लिपकार्ट की कीमत 10-12 अरब डॉलर लगाई जा सकती है।

 

ईबे भारतीय कंपनी में 40-50 करोड़ डॉलर का निवेश करना चाहती है, जबकि चीन की इंटरनेट दिग्गज टेनसेंट और एक संभावित तीसरे निवेशक से भी फंड हासिल करने की बातचीत चल रही है। टेनसेंट की पहचान मोबाइल मेसेजिंग ऐप्लिकेशन वीचैट की वजह से है। उसने भारतीय मेसेजिंग प्लेटफॉर्म हाइक और हेल्थकेयर स्टार्टअप प्रैक्टो में भी पैसा लगाया है। उसने फ्लिपकार्ट का ड्यू डिलिजेंस पूरा कर लिया है।

जानकारों की माने तो फ्लिपकार्ट के लिए इस राउंड की फंडिंग काफी जरूरी है क्योंकि वह ऐमजॉन इंडिया से अपना बाजार बचाने की कोशिश कर रही है। अमेरिकी कंपनी ने भारतीय सब्सिडियरी में पिछले साल 7,000 करोड़ का निवेश किया था। उसने जून 2016 में भारत में निवेश की रकम को 2 अरब डॉलर से बढ़ाकर 5 अरब डॉलर कर दिया था।

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